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30 हजार करोड़ रुपये में मिलेगी 22 घंटे बिजली

Sun, 15 Feb 2015 01:51 AM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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राज्य सरकार 2016-17 से प्रदेश में गांवों को कम से कम 16 घंटे तथा शहरों को 22 घंटे बिजली आपूर्ति करने के लिए खजाना खोलेगी। सरकार के वादे को अमलीजामा पहनाने के लिए सबसे बड़ी चुनौती लोगों तक बिजली पहुंचाने के लिए ट्रांसमिशन एवं वितरण नेटवर्क तैयार कराने की है।
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वित्तीय संसाधनों की कमी से इसमें मुश्किलें आ रही हैं। ऊर्जा विभाग ने सरकार से अगले साल के बजट में इसके लिए ज्यादा बजट का प्रावधान करने का अनुरोध किया है। विभाग ने लगभग 30 हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि सरकार की ओर से बजट में पर्याप्त राशि का प्रावधान किया जाएगा।

पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के मुताबिक 2015-16 में ट्रांसमिशन एवं वितरण नेटवर्क तैयार कराने के लिए लगभग 20,000 करोड़ रुपये की योजना तैयार है। 2016-17 तक 33 केवी क्षमता के 843 नए उपकेंद्रों व लाइनों का निर्माण कराने के साथ 1233 उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि होनी है।
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63000 किमी से लंबी लाइन का होगा निर्माण

इसके अलावा 63000 हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी 11 केवी लाइनों का निर्माण होना है। इसके लिए बजट के जरिये लगभग 3000 करोड़ रुपये की व्यवस्था कराने की कोशिश की जा रही है।

वित्तीय पुनर्गठन योजना के तहत बिजली कंपनियों के लिए 1,000 करोड़ रुपये मांगे जा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को रियायती बिजली आपूर्ति के एवज में सरकार से लगभग 4,500 करोड़ रुपये की मांग की जा रही है।

इसके अलावा नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए भी बजट में पर्याप्त राशि का प्रावधान करने का अनुरोध किया गया है।

एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि कार्यों की प्राथमिकताएं तय करते हुए शासन को बजट प्रस्ताव भेजा है। शासन स्तर पर बिजली के लिए ज्यादा बजट देने पर सहमति हुई है।
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