हैवानियत के बाद मासूम के गले में ठोकी गई कील 15 दिन बाद केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में जटिल ऑपरेशन कर निकाल दी गई। बच्ची की हालत में सुधार है। बलरामपुर की सात साल की बच्ची के साथ 15 मई को हैवानियत हुई थी। उसके गले में कील ठोक दी गई थी। परिजन 16 मई की रात उसे ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे थे। डॉ. वैभव की टीम ने बच्ची को भर्ती करके जांच कराई।
ट्रॉमा सर्जरी के प्रमुख डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि जांच में पता चला कि आठ इंच की धारदार कील गर्दन के रास्ते से मुंह को चीरते हुए खून की नली के पास से होते हुए दिमाग में घुसी थी। इससे आवाज जाने, दिमाग में संक्रमण व अत्याधुनिक रक्तस्त्राव से ब्रेन डेड होने का खतरा था।
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टीम ने बेहद सर्तकता से ऑपरेशन करके कील को निकाल दिया है। इसमें ईएनटी व न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों को शामिल किया गया। बच्ची को खून चढ़ाकर दवाएं दी गईं। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. समीर मिश्रा के साथ डॉ. वैभव जायसवाल, डॉ. यादवेंद्र, डॉ. लोकेश, डॉ. एकता, डॉ. अर्पिता, डॉ. अंजना, डॉ. आकाश, डॉ. विशाल थे।