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Lucknow News: दंपती और आशा के बयान अलग-अलग, बच्चा गोद लेने की गुत्थी उलझी

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लखनऊ। नगराम के एक निजी अस्पताल से दंपती को बच्चा गोद देने के मामले की गुत्थी उलझ गई है। आरोपी आशा कार्यकर्ता और दंपती अलग-अलग बयान दे रहे हैं। इससे जांच की दिशा आगे नहीं बढ़ पा रही है। सीएचसी प्रभारी ने आशा कार्यकर्ता और दंपती से पूछताछ तो दोनों के बयान में विरोधाभास मिला है। जिन निजी अस्पताल का नाम सामने आया है, वहां के डॉक्टर का बयान भी एकदम अलग है। अब तीनों पक्षों की भूमिका संदेह के दायरे में है। संवाद न्यूज एजेंसी ने अपने स्तर पर पड़ताल करते हुए रविवार को तीनों पक्षों से बातचीत।




आशा बोली....झाड़ियाें में पड़ी थी मानसिक मंदित महिला

नगराम निवासी आशा कार्यकर्ता शिवरानी ने बताया कि दो माह पहले वह एक सड़क किनारे से गुजर रही थीं तभी उनकी नजर झाड़ियों में पड़ी मानसिक मंदित महिला पर पड़ी। महिला का बच्चा बाहर आ चुका था। उसने वहां डिलीवरी कराकर बच्चे को नजदीकी निजी अस्पताल पहुंचाया जो जांच में स्वस्थ मिला। वह बच्चा लेकर वापस लौटीं तो देखा मानसिक मंदित महिला वहां से जा चुकी थी। इसके बाद उसने दंपती को बच्चा सौंप दिया था।
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दंपती का दावा...आशा ने अस्पताल से दिलवाया था बच्चा

बच्चा लेने वाली मायावती व उनके पति के मुताबिक, 12 अगस्त की शाम साढ़े चार बजे आशा कार्यकर्ता शिवरानी व अपने पति सीताराम के साथ घर आईं। उन्होंने पूछा कि तुम्हें बच्चा चाहिए? मायावती की हामी भरने पर शिवरानी के पति ने मायावती को बाइक पर बिठाकर चाहत पॉलीक्लीनिक ले गए थे। वहां पर एक महिला बच्चे को गोद में लेकर बैठी थी। महिला ने मुझे बच्चा सौंप दिया था, जिसे हम घर लेकर आ गए।





डॉक्टर बोले...मेरे यहां चलती है सिर्फ ओपीडी

चाहत पॉलीक्लीनिक के संचालक डॉ. अजीत के मुताबिक, उनके क्लीनिक पर सिर्फ ओपीडी का संचालन होता है। मरीजों को भर्ती करने की सुविधा है ही नहीं। ऐसे में यहां डिलीवरी का सवाल ही नहीं उठता है। डॉ. अजीत के अनुसार, दंपती बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने आए थे। बच्चे को गोद लेने वाली महिला के आरोप बेबुनियाद हैं।





ये है पूरा मामला...

नगराम के समेसी गांव निवासी किसान रामहर्ष विक्रम और उनकी पत्नी मायावती ने समाधान दिवस पर शिकायत की थी कि उनके बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहा है। जांच में सामने आया था कि बच्चा उनका है ही नहीं। एक आशा कार्यकर्ता ने बच्चा कहीं से लाकर दिया था। तहसील के अफसरों ने सीएमओ को जानकारी दी थी। तब पूरा मामला उजागर हुआ था। बच्चा शिशु गृह में है।
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आशा कार्यकर्ता की जिम्मेदारी थी कि उसे बच्चे की जानकारी सीएचसी पर देनी चाहिए थी। बिना किसी सत्यापन की प्रक्रिया अपनाएं किसी बच्चे को गोद देना कानूनी रूप से गलत है। आशा कार्यकर्ता व गोद लेने वाली महिला के बयान अलग-अलग हैं। तमाम सवाल अनसुलझे हैं। जांच जारी है।



- राजेश सिंह,
सीएचसी अधीक्षक, नगराम
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