लखनऊ। सांप के काटने से 22 दिन की बच्ची की मौत के मामले की जांच में मोहनलालगंज सीएचसी की लापरवाही सामने आई है। मासूम की धड़कन सामान्य होने के बावजूद डॉक्टर ने नस न मिलने का बहाना बताकर उसे सिविल अस्पताल रेफर कर दिया था। वहां पहुंचने तक बच्ची के शरीर में जहर फैल चुका था और फिर उसकी जान चली गई। जांच समिति के विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि यदि बच्चे की धड़कन सामान्य है तो नस न मिलने को ठोस वजह नहीं माना जा सकता। ऐसे में इलाज के प्रयास जारी रखने चाहिए थे।
बीते दिनों निगोहां के उदयपुर निवासी दिलीप कुमार की 22 दिन की बच्ची को सांप ने काट लिया था। आननफानन परिजन उसे लेकर मोहनलालगंज सीएचसी पहुंचे थे। आरोप है कि डॉक्टरों ने बच्चे का सही इलाज नहीं किया और नस न मिलने का बहाना बताकर सिविल अस्पताल रेफर कर दिया था। सीएचसी के रेफर पेपर में बच्ची की हार्ट बीट 110 दर्ज थी।
जांच समिति के डॉक्टरों के मुताबिक, इतनी हार्ट बीट का मतलब है कि उस समय शिशु की स्थिति सामान्य थी। यदि हाथ-पैर की नस में वीगो नहीं लग रहा था तो बड़ी नस तलाशकर वहां से दवा और जरूरी तरल दिया जा सकता था। जरूरत पड़ने पर बड़ी नस में चीरा लगाकर वीगो डालने का विकल्प अपनाया जा सकता था।
डॉक्टरों का कहना है कि करीब तीन किलो वजन के शिशु के पूरे शरीर में सांप का जहर तेजी से फैला होगा। ऐसे में एंटी स्नेक वेनम समेत अन्य इलाज देने में एक-एक मिनट महत्वपूर्ण था। डॉक्टर ने सीएचसी में इलाज करने के बजाय रेफर करने में कीमती समय निकल गया। बाद में अस्पतालों की दौड़ लगाने में बच्ची की जान चली गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्पदंश के ऐसे मामलों में तत्काल इलाज और लगातार निगरानी जरूरी है। समय पर इलाज मिलने से गंभीर स्थिति टाली जा सकता थी। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
जांच के लिए पहुंचे एडी मंडल
सर्पदंश से दो लोगों की जान जाने के बाद अपर निदेशक लखनऊ मंडल डॉ. जीपी गुप्ता मंगलवार सुबह जांच के लिए मोहनलालगंज सीएचसी पहुंचे। उन्होंने दोनों मामलों के रिकॉर्ड देखने के साथ संबंधित डॉक्टर से जवाब तलब किया। पहले मामले में 22 दिन की बच्ची को बिना इलाज के सिविल रेफर कर दिया गया था। उधर, किशोरी को एंटी स्नेक वेनम की डोज देने के बाद सिविल भेजा गया था। दोनों की ही जान चली गई थी।