कोरोना महामारी में जहां सभी स्कूल, कॉलेज और मदरसे बंद चल रहे थे, उसी दौरान प्रदेश के मदरसों में ताबड़तोड़ नियुक्तियां कर डाली गईं। अब इन नियुक्तियों पर सवाल उठ रहे हैं कि जब मदरसों में ऑनलाइन कक्षाएं तक नहीं चल रही थीं और छात्रों की संख्या लगातार गिर रही थी तो ऐसे समय में इतने बड़े स्तर पर नियुक्तियों की क्या जल्दी थी।
इन नियुक्तियों को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों पर प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण के. रविंद्र नायक ने उप्र. मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार से नियुक्तियों का सारा ब्योरा दस्तावेज समेत मांगा है। इसमें एक अप्रैल 2020 से अब तक की गई सभी नियुक्तियों का विवरण तलब किया गया है।
गौरतलब है कि गत 11 जून को भी प्रमुख सचिव ने रजिस्ट्रार से नियुक्तियों का ब्योरा मांगा था पर उसे नहीं भेजा गया। ऐसे में दोबारा रिमाइंडर भेजकर सूचना मांगी गई है। इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।
प्रदेश में कुल 558 अनुदानित मदरसे हैं। इनमें शिक्षक तथा अन्य कर्मियों की नियुक्तियों का अधिकार प्रबंधक कमेटियों को है। उप्र. मदरसा शिक्षा परिषद के अनुमोदन पर नियुक्तियां की जाती हैं। बताया जा रहा है कि आजमगढ़ मंडल में ही कोरोना काल में लगभग 100 नियुक्तियां की गईं। इसी तरह प्रयागराज में 30 व कानपुर में 20 समेत प्रदेश भर में करीब 300 नियुक्तियां की गईं।
लगातार घट रही छात्रों की संख्या
2016 में मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं में कुल 4.22 लाख विद्यार्थी रजिस्टर्ड हुए थे। 2017 में यह संख्या 3.71 लाख, 2018 में 2.70 लाख, 2019 में 2.06 लाख तथा 2020 में यह घटकर 1.82 लाख हो गई।
शिकायतों पर इन नियुक्तियों का ब्योरा मांगा गया है। कहां कितनी नियुक्तियां हुई है यह विवरण आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
के. रविंद्र नायक, प्रमुख सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण
कोरोना महामारी समय में नियुक्ति पर शासन की कोई रोक नहीं थी। सभी नियुक्तियां शासनादेशों के क्रम में की गई हैं। प्रमुख सचिव को भेजने के लिए पूरा विवरण जुटाया जा रहा है।
-आरपी सिंह, रजिस्ट्रार उप्र मदरसा शिक्षा परिषद