नीट पीजी काउंसिलिंग की मांग को लेकर केजीएमयू में मंगलवार को भी रेजीडेंट डॉक्टरों का धरना जारी रहा। इससे दूसरे दिन भी जांच प्रभावित रहीं तथा ओपीडी में समस्या हुई।
हालांकि, धरने में सिर्फ जूनियर रेजीडेंट ही शामिल हैं। इसके बावजूद सौ लोगों को बिना जांच लौटना पड़ा।
केजीएमयू रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष सचिव डॉ. सौरभ श्रीवास्तव के अनुसार, हमारा मकसद इलाज प्रभावित किए बिना बात रखना है।
नीट पीजी की काउंसिलिंग न होने से काम का दबाव ज्यादा बढ़ गया है। इससे पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। डेढ़ साल से भी ज्यादा वक्त से रेजीडेंट लगातार काम कर रहे हैं।
नीट पीजी की काउंसिलिंग के बाद ही नए रेजीडेंट आ पाएंगे और दबाव थोड़ा कम होगा। फिलहाल धरना जारी रहेगा। केजीएमयू प्रशासन के अनुरोध पर यह फैसला किया गया है कि मरीजों के इलाज पर असर नहीं पड़ना चाहिए।
लोहिया में डॉक्टरों ने काला फीता बांधकर किया काम
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में मंगलवार को सभी डॉक्टरों ने काला फीता बांधकर काम किया। डॉक्टरों के अनुसार, पीजीआई में डेढ़ साल पहले संशोधित सातवां वेतन आयोग लागू हो चुका है। डॉक्टरों ने पीजीआई के समान वेतनमान की मांग पर वित्त मंत्री से मिलने के लिए समय मांगा है। साथ ही शासन को ज्ञापन भी भेजा है। काला फीता बांधकर डॉक्टर बुधवार को भी काम करेंगे। इसके बाद वे आगे के आंदोलन की रूपरेखा तय करेंगे। लोहिया संस्था की फैकल्टी एसोसिएशन के सचिव डॉ. विकास सिंह के अनुसार अगर डॉक्टरों को आंदोलन के अगले चरण तक जाना पड़ता है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा। पूरे कोरोना काल में डॉक्टरों ने दिन-रात काम किया है। अब उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।