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कश्मीर से एके 47 की डिमांड कर रहा था कानपुर से गिरफ्तार आतंकी, ये था प्लान

Sat, 15 Sep 2018 10:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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कमर उज जमां उर्फ डॉ. हुरैरा उर्फ कमरुद्दीन - फोटो : amar ujala
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हिजबुल आतंकी कानपुर को दहलाने की पूरी योजना बना चुके थे। इसके लिए कश्मीर से एके 47 आने वाली थी। आतंकी कमरुज्जमा उर्फ डॉ. हुरैरा ने एटीएस की गिरफ्त में आने से ठीक पहले ब्लैक बेरी मेसेंजर के जरिये कश्मीर में बैठे अपने आका से जल्द ‘सामान’ भेजने को कहा था।

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मोबाइल से मिले एक ऑडियो में भी कमरुज्जमा एके 47 जल्दी भेजने के लिए कश्मीर स्थित हिजबुल के दूसरे साथी पर दबाव बना रहा है। इसका इस्तेमाल गणेश चतुर्थी पर जुटने वाली भीड़ पर किया जा सकता था।

आईजी एटीएस असीम अरुण ने बताया कि कमरुज्जमा फोन कॉल करने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल काफी कम करता था। वह हिजबुल के साथियों से बात करने के लिए ब्लैक बेरी मेसेंजर का इस्तेमाल करता था। इसमें सिर्फ दो लोगों के कांटेक्ट पिन सेव थे।
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पहला कश्मीर के उसके आका ओसामा बिन जावेद का और दूसरा ओसामा द्वारा बताए उस साथी का, जिस पर कमरुज्जमा के लिए फंड और सामान की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी थी। उन्होंने बताया कि दो सितंबर को कमरुज्जमा अवध-असम एक्सप्रेस से लखनऊ उतरा। यहां से बस से कानपुर पहुंचा।

इस दौरान कानपुर में रुके उसके एक साथी से ब्लैक बेरी मेसेंजर पर लगातार बात हो रही थी। कानपुर पहुंचने के बाद उसने कलेक्टरगंज में सिद्धिविनायक मंदिर की रेकी की और उसका वीडियो बनाकर अपने आका को भेजा। कानपुर में उसकी मदद करने वाले दो अन्य साथी फरार हैं। कहा जा रहा है कि दोनों युवक यूपी के ही रहने वाले हैं। हालांकि इनकी अभी शिनाख्त नहीं हो सकी है।

सूत्रों के अनुसार, कानपुर आने के बाद दो-दो दिन के लिए कमरुज्जमा और उसके दोनों साथी गायब हो जाते थे। कहां जाते थे, किससे मिलते थे और क्या करते थे? इस बाबत पूछताछ हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कमरुज्जमा कम बातचीत करता था जबकि बाकी दोनों साथी साफ हिंदी बोलते थे और बातचीत करते थे।

ये एजेंसियां कर रही हैं पूछताछ

कमरुज्जमा से पूछताछ के लिए असम पुलिस के अलावा एनआईए और एयरफोर्स इंटेलीजेंस पूछताछ कर रही है। मामला कानपुर के चकेरी का है और यहां एयरफोर्स का बेस है। इस कारण एयरफोर्स इंटेलीजेंस भी सक्रिय हो गई है और पूछताछ कर रही है।
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असम में पकड़े गए दो साथियों से सुराग मिलने की उम्मीद

उधर, असम पुलिस ने दो संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें एक का नाम शहनवाज आलम और दूसरे का सईदुल आलम है। दोनों ही असम के दक्षिण जरायन के रहने वाले हैं। कमरुज्जमा के पास जो पैसे आए उसके लिए असम के ही एक व्यक्ति का अकाउंट नंबर इस्तेमाल किया गया।

इस खाते में पहले एक लाख और फिर 30 लाख रुपये डाले गए। ये रुपये कमरुज्जमा ने खर्च कर दिए। पकड़े जाने के समय उसके पास से करीब 10 हजार नगद बरामद हुए थे। उसका साथी ओसामा बिन जावेद कहां है, सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि वह कश्मीर के ही किश्तवाड़ में हिजबुल का स्थानीय कमांडर बन गया है। 
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