संसद में बैठकर नीति निर्धारक की भूमिका में आने को बेताब सौ से ज्यादा दागी चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं।
कइयों पर संगीन इल्जाम हैं लेकिन सियासी दलों ने इन सबको नजरअंदाज कर उन्हें गले लगा लिया।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच (एनईडब्ल्यू) की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से 84 कांग्रेस व भाजपा से मैदान में हैं। इनमें से 14 यूपी से भाग्य आजमा रहे हैं।
तमाम प्रत्याशी ऐसे भी हैं, जिनकी खुद की संपत्ति करोड़ों में हैं। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के अब तक के घोषित प्रत्याशियों की संख्या 280 है।
दंगे के आरोपियों को भी दिया टिकट
आप जानकर चौंक जाएंगे कि जिन नेताओं पर मुजफ्फरनगर दंगे के आरापे लगे पार्टियां उन्हें भी टिकट देने में कोई हिचक महसूस नहीं कीं।
कांग्रेस में अब तक घोषित सभी 165 प्रत्याशियों में से 44 (27 फीसदी) तो भाजपा के 115 प्रत्याशियों में से 40 (35 फीसदी) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।
इसी तरह कई अन्य पार्टियों के प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से 14 प्रत्याशी यूपी में भाग्य आजमा रहे हैं। यह सभी कांग्रेस व भाजपा से मैदान में हैं।
दोनों संस्थाओं के अधिकारियों के मुताबिक प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी उनके द्वारा पूर्व के चुनावों में दाखिल किए गए शपथ पत्रों का अध्ययन कर जुटाई र्गई है।
कम नहीं करोड़पतियों की संख्या
इतना ही नहीं, इन प्रत्याशियों पर अपराध के आरोप तो लगे है हैं, इनके पास अकूत संपत्ति भी है।
अब तक कांग्रेस व भाजपा की ओर से उतरे 280 प्रत्याशियों में से 161 करोड़पति हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के 165 प्रत्याशियों की संपत्ति की औसत मालियत 6.29 करोड़ है जबकि भाजपा के 115 प्रत्याशियों की औसत संपत्ति 2.81 करोड़ रुपये है।
जानिए कैसे-कैसे मामले दर्ज हैं
रिपोर्ट में उन प्रत्याशियों की श्रेणी अलग रखी गई है जिनके खिलाफ संगीन मामलों में आपराधिक मामले दर्ज हैं।
कांग्रेस के 44 दागी प्रत्याशियों में से 16 के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास व अपहरण जैसे संगीन मामले दर्ज हैं।
भाजपा के 40 दागियों में से बीस के खिलाफ भी ऐसे ही संगीन मामले दर्ज हैं।
भाजपा के प्रत्याशियों की तीसरी सूची में भी से एक प्रत्याशी सतीश दुबे व कांग्रेस के प्रत्याशी रमेश चंद्र के खिलाफ भी संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं।
बसपा, सपा, कौमी एकता दल से उतरे प्रत्याशियों में से भी कई का आपराधिक इतिहास रहा है।