लखनऊ । पीजीआई इलाके में आवास विकास परिषद की करोड़ों की जमीनों में हेराफेरी करने वाले जालसाज जगत नारायण शुक्ला और उसकी पत्नी ने सोमवार को कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। दंपती पर परिषद की जमीनों के खरीद-फरोख्त में फर्जी डिमांड ड्राफ्ट लगाकर रजिस्ट्री कराने और फिर आवंटन निरस्त कराकर रुपये वापस लेने का आरोप है। आरोप है कि इस तरह का खेल इस दंपती ने आवास विकास ही नहीं कई अन्य जमीनों में भी किया। आवास विकास के अधिकारी ने पीजीआई थाने में केस दर्ज कराया था जिसके बाद से दोनों फरार चल रहे थे।
एसएसआई प्रमोद कुमार सिंह के मुताबिक, पीजीआई थाने में जगत नारायण शुक्ला के खिलाफ तीन मुकदमे दर्ज हैं। इसमें वृंदावन सेक्टर-6 निवासी पद्मजा सिंह ने दो जुलाई 2021 को मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि जगत नारायण ने उनसे जमीन के नाम पर 5.20 करोड़ रुपये ठग लिए थे। आवास विकास की एक फर्जी व्यावसायिक जमीन को दिखाया गया और बताया गया कि यह जमीन उनकी है। इसके लिए रुपये वसूले गए। इसके बाद 8 जनवरी को आवास विकास के संपत्ति अधिकारी नृपेंद्र सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया जिसमें आरोप था कि जगत नारायण शुक्ला ने फर्जी डिमांड ड्राफ्ट देकर परिषद की संपत्तियों की रजिस्ट्री कराई। इसके बाद संपत्तियों के आवंटन को निरस्त करा दिया।
आवास विकास से करीब 25-30 करोड़ रुपये वापस ले लिए थे। वहीं राजाजीपुरम निवासी अनुराग शुक्ला ने जगत नरायण पर 26 लाख रुपये हड़पने का केस दर्ज कराया था। काकोरी में भी उस पर केस दर्ज है। इस मामले में पीजीआई पुलिस ने 15 अप्रैल को जगत नारायण शुक्ला की बेटी दुर्गा, अंबे, नैनसी और उसके भाई सुरेंद्र शुक्ला की पत्नी माला शुक्ला को गिरफ्तार किया था। जबकि जगत नारायण शुक्ला, उसकी पत्नी गायत्री शुक्ला और भाई सुरेंद्र कुमार शुक्ला फरार चल रहे थे। जालसाज दंपती ने सोमवार को कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें पुलिस कस्टडी में दे दिया। पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया। वहीं फरार भाई की तलाश की जा रही है।
रिमांड की अर्जी डालेगी पुलिस
एसएसआई व विवेचक प्रमोद कुमार सिंह के मुताबिक, जगत नारायण शुक्ला व उसकी पत्नी गायत्री शुक्ला ने आत्मसमर्पण कर दिया है। अब पुलिस कोर्ट में रिमांड की अर्जी डालने जा रही है। ताकि दस दिन का रिमांड मिल सके और उनसे पूछताछ कर वारदात के तरीके व गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी हासिल की जा सके। उस पर गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद उसकी संपत्तियों को धारा 14(1) के तहत अटैच किया जाएगा।
इस तरह किया गया फर्जीवाड़ा
पुलिस के मुुताबिक, फर्जीवाड़े को लेकर संपत्तियों की किश्त जमा की फर्जी बैंक रसीद परिषद में दी गई। इसी आधार पर बाद में परिषद के खाते में रुपये जमा करने का दावा किया गया और फिर संपत्तियों का आवंटन निरस्त करने का आवेदन देकर रिफंड मांगा गया। अफसर-कर्मचारियों ने आंख मूंदकर इसकी मंजूरी भी दे दी। कुछ अधिकारी इस बारे में जानते थे लेकिन निजी लाभ के लिए मामले को अपने स्तर पर ही निपटा दिया। पुलिस के मुताबिक, हर संपत्ति के पीछे जगत नारायण शुक्ला अधिकारियों को मोटी रिश्वत देता था। फर्जीवाड़े में हुई कमाई में बंदरबाट को लेकर विवाद के बाद खेल सामने आ गया। फर्जीवाड़े में जिनके नाम संपत्तियां आवंटित हुईं और फिर रिफंड किया गया। उनमें जगत नारायण शुक्ला, गायत्री शुक्ला, माला शुक्ला, सुरेंद्र शुक्ला, दुर्गा, अम्बे शुक्ला और नैनसी शुक्ला का नाम शामिल है।
आवास विकास के अफसरों व अधिकारियों पर हो चुकी कार्रवाई
आवास विकास परिषद ने इस फर्जीवाड़ा में पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित कर्मचारियों में अहमद जमाल लेखाकार, वशिष्ठ मणि त्रिपाठी कनिष्ठ सहायक, देवेश कुमार लेखाकार, सुनील कुमार सरीन कनिष्ठ लेखाधिकारी व इंद्रपाल प्रशासनिक अधिकारी का नाम है। इसके अलावा डॉ. अनिल कुमार उप आवास आयुक्त, हेम पाल सहायक आवास आयुक्त,केडी शर्मा प्रभारी संपत्ति प्रबंधक, मोहन प्रभारी संपत्ति प्रबंधक, राम नरेश वरिष्ठ सहायक, केएन शुक्ला बरिष्ठ सहायक के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई हो चुकी है। वहीं कई रिटायर्ड कर्मचारी व अधिकारी भी इस फर्जीवाड़े में शामिल बताए जा रहे हैं।