शासन ने चीनी मिलों व डिस्टलरी (एथेनाल) से जुड़ी परियोजनाओं को विशेष सुविधाएं व वित्तीय रियायतें देने में आ रही अड़चन दूर कर दी है। इंपावर्ड कमेटी ने वित्त विभाग के मत से अलग औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 की नियमावली के अंतर्गत ही लाभ देने पर सहमति दे दी है। इस संबंध में जल्दी ही दिशानिर्देश जारी करने की तैयारी है।
सूत्रों ने बताया कि हरदोई में पूर्व से स्थापित डीसीएस श्रीराम हरियावां चीनी मिल के विस्तारीकरण व इथेनाल उत्पादन की विविधीकरण परियोजना के लिए 361 करोड़ व 190 करोड़ रुपये पूंजी निवेश के दो प्रस्ताव मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित इंपावर्ड समिति के समक्ष पेश किए गए थे।
समिति में शामिल वित्त विभाग के अधिकारी ने इस प्रस्ताव पर नीतिगत सवाल उठाते हुए कार्यवाही स्थगित करने का मत दिया। अधिकारी का कहना था कि चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग द्वारा वर्ष 2018 में नई नीति लाने का प्रस्ताव तैयार किया गया जिसे फिलहाल स्थगित रखा गया है।
चूंकि, चीनी उद्योग के लिए पूर्व में अलग से प्रोत्साहन नीति रही है, इसलिए चीनी उद्योग तथा आसवानी इकाइयों को औद्योगिक विकास विभाग की नीति से आच्छादित करने का औचित्य नहीं है। इसके बाद मुख्य सचिव ने प्रशासनिक विभाग को चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग से विचार-विमर्श कर प्रकरण में नए सिरे से स्पष्ट प्रस्ताव तैयार कर कमेटी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।