डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में संविदा कर्मचारियों की हड़ताल से सोमवार को मरीजों और उनके तीमारदार भटकते रहे लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। संविदा पर तैनात पैरामेडिकल स्टाफ, वार्ड बॉय और वार्ड आया के हड़ताल पर रहने की वजह से ओपीडी से लेकर ओटी और भर्ती का कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा।
दूरदराज क्षेत्रों से आए मरीज और उनके तीमारदार सुबह सात बजे से ही लाइन में लगे रहे लेकिन हड़ताल की वजह से 11 बजे तक उनका पर्चा नहीं बन सका। स्टाफ के हड़ताल पर रहने की वजह से न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी, गैस्ट्रो और आंकोलॉजी विभाग में करीब दस मरीजों के ऑपरेशन टालने पड़े।
सुबह नौ बजे से खुलने वाली ओपीडी में डॉक्टरों के कमरों में साढ़े ग्यारह बजे तक ताला बंद रहा तो रेडियोलॉजी विभाग में दोपहर 12 बजे तक ताला बंद रहा। डॉक्टरों और जांच के इंतजार में मरीज तड़पते रहे।
इस दौरान कीमो थेरेपी वार्ड में भी सन्नाटा पसरा रहा। दोपहर दो बजे तक कर्मचारी हड़ताल पर रहे और इसके बाद ऐलान किया कि अगर उनकी मांगें एक माह में नहीं मानीं गईं तो वे फिर से हड़ताल पर जाएंगे।
संस्थान के पैरामेडिकल स्टाफ समेत कुल 612 संविदा कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से ओपीडी, ओटी और जांच केंद्रों पर अफरा-तफरी रही लेकिन इलाज नहीं मिला। आंकोलॉजी मरीजों की लिस्ट तक ओटी नहीं पहुंची और उस पर ताला लटका रहा। यही हाल ओपीडी ब्लॉक का रहा। मरीजों व तीमारदारों ने विरोध शुरू किया तो संस्थान के सुरक्षा गार्डों से उनकी नोकझोंक भी हुई और स्थिति मारपीट तक पहुंच गई।
कर्मचारियों के आगे लाचार नजर आया संस्थान प्रशासन
आनन-फानन संस्थान प्रशासन ने अस्पताल के नियमित कर्मचारियों को पर्चा काउंटर और शुल्क जमा काउंटर पर लगाया लेकिन मरीजों की भीड़ के आगे पूरी व्यवस्था फेल हो गई। इसके बाद संस्थान की निदेशक प्रो. नुजहत हुसैन और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मधुप रस्तोगी ने बिना ओपीडी अटेंडेंट के ओपीडी शुरू करवाई।
बिना टोकन और रजिस्टर में एंट्री के डॉक्टरों ने मरीजों को देखना शुरू किया लेकिन थोड़ी देर बाद पूरी व्यवस्था बैठ गई क्योंकि डॉक्टर से दिखाने के बाद न तो जांच हो पा रही थी और न भर्ती क्योंकि काउंटर पर मरीजों की लंबी लाइन थी। गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज बिना इलाज के लौट गए और संस्थान प्रशासन कर्मचारियों के आगे लाचार नजर आया।
रेडियोलॉजी विभाग में डॉक्टरों के गैरहाजिर रहने पर स्टाफ ने ओपीडी कक्ष के दरवाजे पर लगी उनकी नेमप्लेट तक को हटा दिया। कर्मचारियों के दल ने संस्थान की निदेशक प्रो. नुजहत हुसैन से मुलाकात की लेकिन बात नहीं बनी और दोपहर दो बजे तक सभी कर्मचारी हड़ताल पर रहे। वार्ता के बाद संघ के अध्यक्ष रणजीत सिंह यादव ने कहा कि एक महीने में मांगें पूरी न हुईं तो कर्मचारी दोबारा हड़ताल पर जाएंगे।
उधर तड़पते रहे मरीज और इधर नेतागीरी
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रणजीत सिंह यादव के आह्वान पर शुरू हुई हड़ताल में जमकर नेतागीरी हुई। कर्मचारियों का साथ देने के लिए नर्सेज संघ और राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद चिकित्सा संघ के अध्यक्ष अशोक कुमार, यूपी लैब टेकभनीशियन के अध्यक्ष सुरेश रावत और संस्थान के नर्सेज संघ के नेता अमित शर्मा समेत अन्य पदाधिकारी मौके पर पहुंच गए। सभी ने संविदा कर्मचारियों की मांगों को सही ठहराते हुए उनका साथ दिया और हड़ताल पर डटे रहे।
सफाई तक नहीं हो सकी
संविदा कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने की वजह से संस्थान परिसर में साफ-सफाई का काम भी बंद रहा। वार्ड से लेकर ओपीडी और प्रशासनिक भवन में जगह-जगह गंदगी रही। आलम ये था कि संस्थान परिसर में लगे कूड़ेदान गंदगी से भर गए और इसकी दुर्गंध से मरीजों-तीमारदारों का सांस लेना तक मुश्किल हो रहा था।
ये हैं प्रमुख मांगे
- संघ के अध्यक्ष रणजीत सिंह यादव को बहाल किया जाए
- कर्मचारियों को सरकारी संविदा पर नियुक्त किया जाए
- कुशल कर्मचारियों को 15 व अकुशल को 10 हजार का वेतन मिले
- कर्मचारियों को पीएफ की रसीद, ईएसआई कार्ड व परिचय पत्र मिले
- कर्मचारियों के वेतन में हर छह माह में बढ़ोतरी हो
- संघ कर्मचारियों की बैठक के लिए संस्थान में स्थान दिया जाए
मान ली गईं चार मांगें
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. नुजहत हुसैन का कहना है कि संविदा कर्मचारियों ने बहकावे में आकर हड़ताल की जिसकी वजह से मरीजों को परेशानी हुई और ओपीडी से लेकर ओटी तक का कामकाज प्रभावित रहा। सुबह 11 बजे सभी विभागों की ओपीडी को शुरू करा दिया गया था। न्यूरो ओटी में पहले से तय सर्जरी भी की गई।
कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात हुई और उनको बताया गया कि उनकी सभी मांगों को लेकर मुख्य सचिव आलोक रंजन और प्रमुख सचिव आरपी सिंह को जानकारी दे दी गई है। चार मांगें मान ली गई हैं। जो भी अन्य मांगें हैं उनको पूरा होने में समय लगेगा और शासन की अनुमति जरूरी है। कर्मचारियों से एक माह का समय मांगा गया है और सभी मांगों पर फैसला हो जाएगा।