हिट एंड रन में घायल हुए गोंडा के मुस्लिम शेख और अब्दुल्ला शेख की पीड़ा कम नहीं है। सलमान खान तो भले ही बरी हो गए हों पर हादसे के बाद इन्हें कोई मदद नहीं मिली, नौकरी तक छूट गई। यहीं नहीं, वहां से जान के भी लाले पड़ गए इसलिए मुंबई को अलविदा कहना पड़ा। अब वे गांव में किसी तरह मजदूरी व खेती किसानी से गुजारा करते हैं।
विज्ञापन
कोतवाली देहात क्षेत्र के भरहापारा के मुस्लिम शेख तो बृहस्पतिवार को घर पर नहीं मिले पर उनके वालिद नियामत ने बताया कि बेटा पास के गांव में गया है। वे बताते हैं, हादसे के बाद मुस्लिम के इलाज में काफी पैसे खर्च हो गए, लेकिन सहायता के नाम पर उन्हें कुछ भी नहीं मिला। वे अपनी पीड़ा सुनाते हुए कहते हैं कि उनके बेटे की जान को खतरा हो गया था, इसलिए उसे मुंबई छोड़ना पड़ा। अब यहां खेती-किसानी कर परिवार संभाल रहा है।
वहीं, अशरफ खेड़ा के रहने वाले अब्दुल्ला भी जान जाने के डर से मुंबई छोड़कर अपने घर लौट आए। उनके पिता ने बताया कि बेटे को न सलमान ने किसी प्रकार की सहायता दी न ही सरकार की ओर से कोई सुविधा मिली। (फोटो में, मुस्लिम शेख के घर के बाहर पड़ोसी चर्चा करते हुए।)
विज्ञापन
बुरे वक्त में सभी ने छोड़ दिया साथ
सलमान खान की गाड़ी से ड्राईविंग के दौरान घायल कोतवाली देहात क्षेत्र के असरफखेड़ा गांव के रहने वाले अब्दुल्ला की पत्नी रेशमा ने अपनी पीड़ा सुनाते हुए कहा कि जब वक्त बुरा आता है तो साया भी साथ छोड़ देता है, बुरे वक्त में किसी ने साथ नहीं दिया, जो अजीज हुआ करते थे, वह भी कतराने लगे थे। मगर धीरे-धीरे समय के साथ ही सबकुछ ठीक हो गया अब वह अपने परिवार के साथ खुशहाल है।
अदालत के फैसले से टूट गई आस हादसे में घायल पीडि़त मन्नू के परिवार की एक महिला ने बताया कि हादसें के बाद इलाज के लिए किसी ने सहायता नहीं की। किसी तरह परिवार के लोगों ने मिलकर इलाज कराया। कोर्ट से एक उम्मीद थी कि फैसला आने के साथ ही कोर्ट से सभी पीडि़तों के साथ ही मन्नू को भी सहायता मिलेगी। मगर कोर्ट के फैसले से आस टूट गई। अब मजदूरी और किसानी के सहारे जिन्दगी चलेगी।
अब्दुल्ला बोले, जज ने सलमान की सुनी हमारी भी सुनें
'हिट एंड रन केंस' में जख्मी हुए अब्दुल्ला ने कहा कि वे अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं, पर वे उच्चतम न्यायालय में अपील नहीं करेंगे। लखनऊ आए अब्दुल्ला ने अमर उजाला बातचीत में कहा कि अदालत ने सलमानी की सुनी अब हमारी भी सुनें। उन्होंने कहा कि आखिरी आस अब सलमान से है उनसे मुलाकात की कोशिश करूंगा। अगर वो आर्थिक मदद करेंगे तो ठीक है वरना मेरी किस्मत।
वे कहने लगे कि हादसे ने मेरी दुनिया ही बदल दी। जिस बेकरी में नौकरी करता था वहां पुलिस व पत्रकारों का जमावड़ा लगने लगा, लिहाजा सेठ ने नौकरी से निकाल दिया। अब कहीं और नौकरी मांगने जाव तो टूटी टांग आड़े आती थी।
गोंडा में भी रोजगार नहीं मिला। मुझे उम्मीद थी कि सलमान के वकील मुझसे संपर्क करके कुछ सुलह समझौते की बात करेंगे, पर ऐसा नहीं हुआ। हां, यह सच जरूर है कि डेढ़ महीने अस्पताल में रहने के दौरान मेरा एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ, किसने पैसे दिए मैंने नहीं जानता।
गोंडा के अशोक की गवाही से मजबूत हुआ सलमान का पक्ष
जिस ड्राइवर अशोक सिंह की गवाही से सलमान खान का पक्ष मजबूत हुआ, वह गोंडा का रहने वाला है। अशोक ने ही 12 साल बाद कोर्ट में गवाही दी थी कि वारदात वाले दिन गाड़ी सलमान नहीं, वह खुद चला रहा था।
वजीरगंज के बड़ा दरवाजा का रहने वाला अशोक सिंह राना की 25 साल पहले मुंबई के जुहू चौपाटी में अदाकारा हेलन से मुलाकात हुई थी और वे उनके घर काम करने लगे। बाद में सलमान के यहां ड्राइवर बन गए।
बृहस्पतिवार को जब अमर उजाला प्रतिनिधि अशोक के घर पहुंचा तो वह वहां मौजूद नहीं था। अशोक के बड़े भाई रामप्रताप ने बताया कि खुद को कामयाबी से जोड़ने के लिए अशोक 25 साल पहले 1989 में मुंबई पहुंच गया। काफी समय तक काम नहीं मिला तो वह जुहू चौपाटी पर गुब्बारा बेचने लगा। (फोटो में, अशोक सिंह का भाई राम प्रताप सिंह।)
नहीं बताया कि 12 साल बाद क्यों सलमान के पक्ष में आया
एक दिन मशहूर एक्ट्रेस हेलन उनकी दुकान पर गुब्बारा लेने पहुंच गईं। अशोक के सरल स्वभाव से प्रभावित होकर उन्हें अपने साथ ले गईं।
इसी बीच, उनके सौतेले बेटे सलमान ने अशोक को अपने साथ रख लिया। बकौल राम प्रताप, हादसे में एक की मौत के बाद जब मुंबई पुलिस ने केस फाइल किया तो अशोक को गवाह बनाया।
जब उनसे पूछा गया कि अशोक ने आखिर 12 साल बाद गाड़ी खुद चलाने का बयान क्यों दिया तो रामप्रता ने कहा कि उन्हें इसकी विशेष जानकारी नहीं।
इस बारे में अशोक ही बता सकते हैं। रामप्रताप ने अशोक से बात करने के लिए फोन मिलाया तो उसका मोबाइल स्विच आफ मिला।(फोटो में, अशोक सिंह का भतीजा सुरेश सिंह।)