सुनील जंग की मां व पिता।
- फोटो : amar ujala
राइफलमैन सुनील जंग की इस वीरता का बीजारोपण बचपन में ही हो गया था। देशभक्ति उन्हें विरासत में मिली थी। उनके दादा मेजर नकुल जंग व पिता नर नारायण जंग महत भी सेना को सेवाएं दे चुके थे। उसी परंपरा को सुनील जंग ने आगे बढ़ाया। उनकी इस देशभक्ति का परिचय उस समय मिल गया था, जब वह आठ साल के थे और स्कूल के एक फैंसी ड्रेस प्रोग्राम में पार्टीसिपेट कर रहे थे।
उन्होंने मंच से ऐलान किया कि देश की रक्षा के लिए वह अपने लहू का एक-एक कतरा बहा देंगे और मौका पड़ने पर उन्होंने अपने शब्दों का अक्षरश: पालन भी किया। वर्दी का इतना शौक था कि जिद करके पिता की पुरानी वर्दी काटकर अपने लिए ड्रेस तैयार कराई थी।
मां को मलाल, नहीं मिला शौर्य चक्र
राइफलमैन सुनील जंग की मां बीना महत इस बात से दुखी हैं कि बेटे को मरणोपरांत शौर्य चक्र नहीं मिला। जिसके लिए वह लगातार केंद्र सरकार से गुहार भी लगाती रही हैं। मां चाहती है कि सुनील की बहन सुनीता को सरकारी नौकरी मिल जाय तो तंगहाली दूर हो। बीना महत ने बताया कि सरकार ने स्टेडियम बनाने का वादा किया था जो अभी तक अधूरा है।