अटल बड़े नेता थे। इलाहाबाद के विद्यार्थी मिलने आए तो उनके सवाल पर अटल के मुंह से जो जवाब निकला उसे सुनकर कुछ देर के लिए इन छात्रों की भी समझ में नहीं आया कि वह आगे क्या बोलें..। खान-पान के शौकीन वाजपेयी मजाकिया भी कम नहीं थे। आपातकाल के दौरान विधानसभा के मौजूदा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित भी अटल जी के साथ इलाहाबाद के नैनी जेल में बंद थे।
एक दिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों का एक ग्रुप वाजपेयी से मिलने जेल आया। बातचीत चली तो थोड़ी देर में बेतकुल्लफी तक पहुंच गई। एक छात्र ने अटल जी से पूछ लिया, 'अटल जी आपने शादी क्यों नहीं की? अटल जी ने सुना और एक क्षण के लिए आंखें बंद की और फिर जोर का ठहाका लगाते हुए बोले, 'यार! जब शादी की उम्र थी तब जिंदगी की मस्ती में डूबा रहा। इस बारे में सोचने का मौका ही नहीं मिला। अब, जब सोचता हूं तो कोई मिलता नहीं। इतना सुनकर छात्रों का हंसते-हंसते बुरा हाल।
बकौल विधानसभा अध्यक्ष 'बातचीत करके थोड़ी देर बाद जब वे विद्यार्थी वापस लौटने को खड़े हुए तो अटल जी ने उस छात्र को रोका जिसने उनसे शादी को लेकर सवाल किया था। एक क्षण उसे गौर से देखा और फिर कंधे पर हाथ रखकर जैसे कोई राज की बात कर रहे हों उससे बोले, 'यार! देखना, अगर कोई मिले तो जरूर बताना। अटल का यह कहना था कि हम लोगों के मुंह से भी हंसी निकल गई। वह छात्र तो पूछिए न सीधे वाजपेयी जी के पैरों पर। वाजपेयी जी उसे उठाया और कहा, 'जीवन में कभी मस्ती खत्म न होने देना।'
हृदयनारायण दीक्षित जी बताते हैं, 'मेरी अटल जी से पहली मुलाकात 25 वर्ष की उम्र में उस समय हुई जब मैं उन्नाव में जनसंघ का जिला मंत्री था। उन्नाव की तरफ से अटल जी को थैली देने की योजना बनी। अटल जी आए। मैने बोलना शुरू किया। इसी बीच अचानक अटल जी की आवाज सुनाई दी, 'हृदय जी! यह साहित्य सम्मेलन नहीं है। भाषा सरल करो।' फिर बोलने खड़े हुए तो कहा, ' आप लोग सोच रहे होंगे कि यह थैली मैं मार मार दूंगा। घबराइए नहीं। निश्चिंत रहें। आपकी थैली सुरक्षित रहेगी। मैं थैली मार नहीं हूं। इसे लेकर नहीं जाऊंगा। थैली का धन उन्नाव की पार्टी और पार्टी वाले ही खर्च करेंगे।