अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से 641 पदों के लिए 15 जुलाई को हुई परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। एसटीएफ की जांच में इसकी पुष्टि हुई है। एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया रिपोर्ट गुरुवार को आयोग को सौंप दी जाएगी। परीक्षा निरस्त होगी या नहीं इसका फैसला आयोग करेगा।
परीक्षा से एक दिन पहले यानी 14 जुलाई को दिल्ली की एक निजी कोचिंग की संचालिका नीतू सिंह ने एक प्रश्नपत्र फेसबुक पर पोस्ट कर उसकी सत्यता के बारे में पूछा था। अगले दिन जब परीक्षा हुई तो प्रश्नपत्र वही था। इसकी शिकायत अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के अधिकारियों से की गई।
आयोग ने सितंबर कीशुरुआत में इसकी जांच यूपी एसटीएफ को सौंपी थी। एसटीएफ ने सोशल मीडिया पर पेपर अपलोड करने वाली नीतू सिंह से संपर्क किया। नीतू ने अपने एक छात्र का नाम बताया जो बागपत के बड़ौत जिले का रहने वाला है। एसटीएफ उस छात्र तक पहुंची तो उसने बताया कि बड़ौत के ही एक अन्य छात्र ने उसे पेपर मुहैया कराया था। एसटीएफ फिलहाल उसकी तलाश कर रही है।
अखिलेश सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 14 विभागों के 641 पदों के लिए विज्ञापन जारी कर आवेदन मांगे गए थे। परीक्षा से पहले ही सपा की सरकार चली गई। नई सरकार ने कई भर्तियों और भर्ती प्रक्रिया की विजलेंस जांच कराई।
विजिलेंस ने इन पदों को जांच के दायरे से यह तर्क देते हुए बाहर कर दिया कि इसमें लिखित परीक्षा या इंटरव्यू नहीं हुए हैं। लिहाजा इसमें किसी तरह की गड़बड़ी की कोई आशंका नहीं है। आयोग ने 15 जून को इस भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया और 15 जुलाई को इसके लिए परीक्षा कराई।
इस परीक्षा में 67,444 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। 15 जुलाई को लखनऊ और कानपुर के कुल 149 केंद्रों पर हुई परीक्षा में 30,145 अभ्यर्थी ही शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद में पेपर लीक की शिकायत मिलने पर इस जांच को एसटीएफ को सौंपा गया था।