उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक रविकांत सिंह को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होगी। रविकांत के कार्यकाल में हुई 53 सहायक प्रबंधकों की नियुक्तियां भी रद्द होंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार की शिकायतें सही पाए जाने पर ये फैसला किया।
कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभात कुमार ने सीतापुर रोड योजना निवासी जयसिंह की शिकायतों पर पीसीएफ के प्रबंध निदेशक प्रमोद कुमार उपाध्याय से मामले की जांच कराई थी। रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने के बाद कृषि उत्पादन आयुक्त ने मुख्यमंत्री से रविकांत को निलंबित करने और नियुक्तियां रद्द करने की सिफारिश की थी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2015 में 53 सहायक प्रबंधक के पदों पर नियुक्ति में विज्ञापन जारी होने के बाद आवश्यक शैक्षिक योग्यता में परिवर्तन कराया गया। न्यायालय के रोक के बावजूद ज्वाइनिंग कराई गई।
इटावा के कई लोगों को नियमों की अनदेखी करके नियुक्तियां दी गईं। दो डिफाल्टर निजी चीनी मिलों को नियम विरुद्ध ऋण देने का भी आरोप था। बैंकों के एनपीए को दीर्घकालीन कर्ज में बदला गया। यूपीसीबी के वर्षों के किराएदार आइडीबीआई एवं एक्सिस बैंक से भवन खाली कराकर को-ऑपरेटिव बैंक को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगा था।