प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई) में बन रहे गरीबों के मकान पर अमीरों ने भी दावेदारी कर रखी है। इनके पास पक्के मकान व लग्जरी कार भी है और उनकी लाखों रुपये की कमाई है। लेकिन वे भी पीएम आवास पाने की जुगत लगाए हैं।
पीएम आवास बनाने के लिए प्रदेश स्तर पर नामित नोडल एजेंसी राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) की जांच में ऐसे तमाम लोगों के आवेदनों का पता चला है। इनकी संख्या 5 लाख से अधिक होने की आशंका है।
सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2017-18 में योजना के ‘लाभार्थी आधारित आवास निर्माण’ घटक के तहत 3,30,559 मकान बनाने के लिए डीपीआर तैयार कराई गई थी। लेकिन आवेदनों की जांच में करीब 98,465 ऐसे लोगों के आवेदन मिले जिनके पास कार, पक्के मकान के अलावा लाखों रुपये की कमाई थी।
इनकी सालाना औसत आय भी तीन लाख से अधिक थी। जबकि मानक के मुताबिक इस घटक के तहत मकान बनाने के लिए उसी व्यक्ति को योजना का लाभ दिया जा सकता है, जिसकी सालाना आय 3 लाख रुपये से कम हो। लेकिन आय सीमा से कई गुना अधिक आय वाले लोगों ने भी आवेदन कर रखा है। इस आधार पर सूडा ने सभी 98,465 लोगों के आवेदन को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की है।