केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की संशोधित वितरण योजना (रिवैम्पड डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम) के तहत लगाए जाने वाले प्रीपेड स्मार्ट मीटर की कीमत उपभोक्ताओं से वसूलने का राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने विरोध किया है। उपभोक्ता परिषद का कहना है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर का खर्च सरकार को ही वहन करना चाहिए। परिषद ने केंद्र सरकार से इससे संबंधित कानून और नीति में बदलाव की मांग की है।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से जारी गाइड लाइन के तहत प्रीपेड स्मार्ट मीटर की कीमत उपभोक्ताओं से वसूलने का प्रावधान है जो पूरी तरह गलत है। वर्मा ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को प्रस्ताव भेजकर अनुरोध किया जाए कि स्मार्ट मीटर की कीमत और उस पर लगने वाले जीएसटी की वसूली उपभोक्ताओं से करने का प्रावधान समाप्त किया जाए।
स्मार्ट मीटर पर आने वाले खर्च को अनुदान में बदला जाए जिससे उपभोक्ताओं पर उसका बोझ न पड़े। जब कनेक्शन लेते वक्त उपभोक्ताओं ने मीटर की कीमत जमा कर दी है और इसकी पांच वर्ष की गारंटी है तो बीच में किसी योजना के तहत मीटर बदला जाना और उसकी कीमत वसूलना उपभोक्ता हितों को खिलाफ है।