अपना दर्द भूलकर ग्रामीणों के लिए मास्क तैयार कर रहीं महिलाएं।
- फोटो : amar ujala
दुनिया में कितना गम है, मेरा गम कितना कम है...। जी हां, दूसरों का दुख देखिए तो अपना दर्द खुद-ब-खुद कम लगने लगेगा। यह कहना है केजीएमयू में भर्ती कैंसर पीड़ित बच्चों की माताओं का।
एक तरफ अपने बच्चे का इलाज तो दूसरी तरफ कोरोना का डर। इन सबको भूल कर ये महिलाएं जुटी हैं मास्क तैयार कर उन्हें गांव के लोगों में निशुल्क बांटने में।
इनका नेतृत्व संभाला है काकोरी निवासी सरला ने जिनका बच्चा खुद कैंसर का मरीज था और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। सरला ने ईश्वर वेलफेयर फाउंडेशन के सहयोग से खुद ही मास्क बनाने का जिम्मा लिया है।
उनका साथ दे रहे हैं धर्मेन्द्र, विमला, माया और सुनीता। ये मास्क निशुल्क बांटे जा रहे हैं। सरला का कहना है कि अब तो बाहर के लोग गांव तक पहुंच गए हैं, वहां सुरक्षा के उपाय करने जरूरी है। एक दिन में कम से कम 100 मास्क खुद सरला तैयार कर रही हैं। टीम के कुछ सदस्य इन्हें गांव तक पहुंचाने में लगे हैं।