पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों में की हालत एक जैसी हो गई है। यूपी में लोकतंत्र चोटिल हुआ है तो उत्तराखंड में लोकतंत्र अस्थिरता का शिकार हो गया है। दोनों राज्यों में बेरोजगारी, महंगाई बढी है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों में की हालत एक जैसी हो गई है। यूपी में लोकतंत्र चोटिल हुआ है तो उत्तराखंड में लोकतंत्र अस्थिरता का शिकार हो गया है। दोनों राज्यों में बेरोजगारी, महंगाई बढी है। स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। भ्रष्टाचारियों का बोलबाला है। विकास अवरुद्ध है।
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उन्होंने उत्तराखंड के सियासी हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भाजपा को यूपी के मुख्यमंत्री को उत्तराखंड भेज देना चाहिए। ताकि नेतृत्व परिवर्तन के झंझट से मुक्ति मिल जाए। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों प्रदेशों में किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। व्यापारी परेशान है। नौजवानों का भविष्य अंधकारमय है। उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र रसातल पर है। जनता में भाजपा सरकार के प्रति असंतोष बढ़ता जा रहा है। दोनों राज्यों में पलायन की समस्या समान रूप से गम्भीर है।
कानून व्यवस्था में गिरावट और राजनीतिक तिकड़मबाजी के चलते दोनों राज्यों में न तो पूंजी निवेश हो रहा है और ना ही नए उद्योग धंधे लग रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दौर में सरकारी निष्क्रियता और अकर्मण्यता के कारण लोग मौत के शिकार हुए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा की झूठे वादों और नफरत फैलाने की राजनीति ने समाज को बांटा है। वह सद्भाव बिगाड़ रही है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के कामों को ही अपना बताकर भ्रम फैला रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के कुशासन से जनता त्रस्त हो गई है। आगामी विधानसभा चुनाव में जनता भाजपा को सबक सिखाएगी। सपा की सरकार बनने पर लोकतंत्र बहाल हो सकेगा।