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रेप पीड़िताओं पर अखिलेश के मंत्री ने दिया ये कैसा बयान

Thu, 14 Aug 2014 12:40 PM IST
अखिलेश यादव/अमर उजाला, लखनऊ
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‘ऐसी रिपोर्ट्स आई हैं कि सरकारी मुआवजे के लिए लड़कियां खुद को रेप विक्टिम बता रही हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा करने से 25-50 हजार रुपये मिल जाएंगे।
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प्रदेश में ऐसी बहुत सारी रिपोर्ट्स आ रही हैं जहां मां-बाप अपने बेटियों को लेकर आ रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि मुआवजा देने से रेप विक्टिम का भला होगा।’ ये शर्मनाक बोल हैं सूबे के पिछड़ा वर्ग एवं विकलांग कल्याण मंत्री अंबिका चौधरी के।

चौधरी बुधवार को कानपुर रोड स्थित सीएमएस में पांचवीं अंतरराष्ट्रीय मीडिया कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। यह कॉन्फ्रेंस ‘महिलाओं को हिंसा से आजादी’ थीम पर रखी गई थी।
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10 प्रतिशत बढ़े रेप के मामले

कैबिनेट मंत्री चौधरी की बातों को सुन देश भर से आईं महिला अधिकार एक्टिविस्ट्स हतप्रभ रह गईं। कुछ बेहद नाराज हुईं। लेकिन वे कुछ कहतीं इससे पहले चौधरी आगे बढ़ गए और कानूनों को बेकार बताते हुए दावा करने लगे कि ‘कानून बनाने से रेप नहीं रुकेंगे।

निर्भया कांड के बाद आप ही महिलाओं के दबाव की वजह से रेप के आरोपियों को फांसी का कानून बनाया गया है, लेकिन उससे हुआ क्या? उल्टे रेप की घटनाएं 10 प्रतिशत बढ़ गईं।’

उन्होंने दहेज रोकथाम कानून पर भी कहा कि ‘क्या इससे दहेज हत्याएं रुक गईं?’ उनसे पहले वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला अपने भाषण में कह गए थे कि जब तक थिंक-टैंक कहे जाने वाले पदों जैसे विदेश सचिव, डीजीपी, गृह सचिव, राज्यों में मुख्य सचिव आदि पर महिलाएं नहीं आएंगी, उनके प्रति समाज उनके मामलों को संजीदगी से नहीं लेगा।

'महिलाओं को पद देने से नहीं बदलेंगे हालात'

अंबिका चौधरी ने इस पर कहा कि सपा ने ही यूपी की पहली महिला मुख्य सचिव बनाई थी, उनके साथ लोगों ने सही सुलूक नहीं किया। महिलाओं को प्रमुख पद देने से हालात नहीं बदलेंगे।

अंबिका चौधरी ने बताया कि कई बार रेप और यौन अपराध में पीड़ित के परिवार उनसे संपर्क करके कहते हैं कि पुलिस को एफआईआर दर्ज करने से रोकिए, वरना परिवार की बदनामी होगी।

जब परिवार तैयार नहीं हैं तो पुलिस कैसे काम करेगी? हर महीने ऐसे 3-4 मामले उनके पास आ रहे हैं।

मंत्री ने पीड़ितों को ही कठघरे में खड़ा कर दिया

इस पर सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की डायरेक्टर रंजना कुमारी ने कहा कि यह बेहद गैर जिम्मेदाराना भाषण था। कौन मां-पिता सरकार से पैसों के लिए अपनी बेटी पर रेप का लांछन लगवाएंगे? पैसों के लिए कौनसी लड़की कहेगी कि उसका रेप हुआ। रेप के बाद समाज लड़की के लिए कैसी सोच रखता है, क्या यह किसी को बताने की जरूरत है।

कैबिनेट मंत्री ने तो पीड़ित को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। मैं दर्शक दीर्घा से जब अंबिका चौधरी को सुन रही थी, उसी समय विरोध करने की कोशिश की लेकिन तत्काल बात बदल दी गई।

वहीं मंत्री के बयान पर एसिड अटैक सरवाइवर सोनाली मुखर्जी ने कहा कि मैं 12 साल से अपने गुनहगारों को सजा दिलाने के लिए संघर्ष कर रही हूं। मैं जानती हूं कि हिंसा और उसके बाद के हालात से गुजरने का दर्द क्या होता है।

मंत्रीजी तो कह गए, लेकिन 25-50 हजार रुपये के लिए कौन लड़की कहेगी कि उसका रेप हुआ? मैंने सुना तो विश्वास नहीं हुआ वे क्या कह गए, लेकिन अब लगता है कि वे राजनीतिक क्षेत्र के लोग कुछ भी कह सकते हैं। वे कहां उस दर्द को समझेंगे जो पीड़िताएं सहती हैं।
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पुलिस को दर्ज करनी होगी एफआईआर

मंत्री के बयान की आलोचना करते हुए लीगल राइट्स एक्टिविस्ट रेणु मिश्रा ने कहा कि मंत्री यह कैसे तय कर सकते हैं कि केस दर्ज हो या नहीं मुझे समझ में नहीं आता कि रेप और यौन हिंसा के मामलों की जानकारी होने पर भी पुलिस केस दर्ज क्यों नहीं करेगी?

इन मामलों को राज्य को लड़ना होता है क्योंकि अपराध राज्य के खिलाफ हुआ है। मंत्रीजी यह तय नहीं कर सकते कि एफआईआर दर्ज करवाई जाए या नहीं।

पुलिस की जानकारी में अगर अपराध है तो उसे दर्ज करके जांच करनी ही होगी।
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