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बिजली कटौती पर 'अपनों' ने ही अखिलेश को घेरा

Wed, 11 Jun 2014 09:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बलरामपुर
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जिले में बदहाल विद्युत व्यवस्था को लेकर अब सपाई भी मुखर होने लगे हैं। युवा सपाई ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर विद्युत आपूर्ति में सुधार किए जाने की मांग की है।
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मंगलवार को मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में मुलायम यूथ बिग्रेड के पूर्व जिलाध्यक्ष आदिल हुसैन ने कहा है कि जिले में बिजली की आपूर्ति पूरी तरह से चरमरा गई है।

बिजली के अभाव के कारण व्यापारी, किसान, छात्र, वकील व समाज का हर तबका परेशान है। बिजली न मिलने से नगरवासियों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है।

14 से 18 घंटे बिजली की मांग

विद्युत आपूर्ति न होने के कारण नलकूपों का संचालन नहीं हो पा रहा है। किसान फसलों की सिंचाई को लेकर चिंतित हैं। जिले के उद्योग धंधे भी चौपट हो रहे हैं।

पावर कार्पोरेशन के अधिकारी उपभोक्ताओं का फोन नहीं उठा रहे है। आदिल ने मुख्यमंत्री नगर क्षेत्र में कम से कम 18 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्र में 14 घंटे विद्युत आपूर्ति किये जाने की मांग मुख्यमंत्री से की है।

गौरतलब है कि अभी तक सपा विरोधी पार्टियां ही प्रदेश सरकार द्वारा बिजली आपूर्ति न किए जाने की निंदा करती थीं, पर यह पहली बार है जब सपा नेता ही अखिलेश के खिलाफ बोल रहे हैं।

सपा के गढ़ में भी कटौती

प्रदेश में बिजली संकट की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कटौतीमुक्त घोषित मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गृह जनपद इटावा समेत वीवीआईपी इलाकों में भी तीन-चार घंटे की आपात कटौती की जा रही है।

जिसके बाद अब कहा जा रहा है कि प्रदेश के लोगों को बिजली संकट से अभी फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है। मांग में लगातार हो रही बढ़ोतरी से हालात संभाले नहीं संभल रहे हैं।

जहां एक तरफ बिजली की कमी बनी हुई है वहीं प्रचंड गर्मी के कारण ट्रांसफार्मर, केबिल व लाइनों की गड़बड़ियों के चलते बड़े पैमाने हो रहे लोकल फाल्ट की वजह से भी लोगों तक बिजली नहीं पहुंच पा रही है।

अतिरिक्त बिजली खरीदने के बावजूद पावर कार्पोरेशन लोगों को तय शिड्यूल के मुताबिक आपूर्ति नहीं कर पा रहा है।
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बिजली के कारण जल आपूर्ति की भी समस्या

बिजली कटौती के चलते जलापूर्ति भी प्रभावित हो रही है। अभियंताओं का कहना है कि पारा गिरने या मानसून के आने के बाद ही बिजली संकट से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है क्योंकि वितरण और ट्रांसमिशन नेटवर्क भी गर्मी के चलते जवाब दे रहा है।

यह है बिजली का गणित
प्राइम नंबर
बिजली की मांग---13,300 मेगावाट

उपलब्धता---12,200 मेगावाट
कमी---1100 मेगावाट
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