पूर्व एमएसएमई मंत्री और सपा नेता भगवत सरन गंगवार का कहना है कि भाजपा सरकार ने पिछड़ों और दलितों के साथ भेदभाव किया है। इस बार के चुनाव में अपने काम और भाजपा सरकार की असफलता के कारण सपा पूर्ण बहुमत से 2022 में सरकार बनाएगी।
पूर्व एमएसएमई मंत्री और सपा नेता भगवत सरन गंगवार आश्वस्त हैं कि उत्तर प्रदेश में अबकी बार उनकी पार्टी की ही सरकार बनेगी। इसका आधार पर वे समाजवादी पार्टी की सरकार के काम और मौजूदा सरकार की विफलताओं को बताते हैं। वह मानते हैं कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव जैसा नेता पूरे हिंदुस्तान में ढूंढे से नहीं मिलेगा। भाजपा की सरकार तो पिछड़ों और दलितों के साथ भेदभाव कर रही है। पेश हैं उनसे बातचीत के मुख्य अंश...
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सवाल: चुनावी लिहाज से सपा का माहौल कैसा है?
जवाब: हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 400 पार का नारा दिया है। इस बार के विधानसभा चुनाव में यह नारा सच साबित होगा। दिल्ली में आम आदमी पार्टी ऐसा करके दिखा भी चुकी है। इसलिए यूपी में भी यह नामुमकिन नहीं है।
सवाल: 400 पार का आधार क्या है?
जवाब: समाजवादी पार्टी की सरकार के काम और मौजूदा भाजपा सरकार की विफलता इसका आधार है। भाजपा 2017 में झूठ बोलकर चुनाव जीती थी। अपने घोषणापत्र का एक भी वादा पूरा नहीं किया। कहा था कि किसानों का कर्ज माफ करेंगे, लेकिन बाद में एक लाख रुपये की कैपिंग लगा दी। बैंकों ने कुछ ऐसा खेल किया कि उसका लाभ भी बड़ी तादाद में किसानों को नहीं मिला। एक लाख की कैपिंग में भी किसानों को योजना के दायरे से बाहर करने के तरीके ढूंढे गए।
सवाल: भाजपा का दावा है कि सपा सरकार से लंबा एक्सप्रेस-वे बनाकर दिखाया?
जवाब: देखिए, हमने 2017 का चुनाव एक्सप्रेस-वे पर नहीं लड़ा था। जिस पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का भाजपा सरकार श्रेय ले रही है, उसका एलाइनमेंट किसने किया। प्रोजेक्ट किसकी कल्पना है। यह जगजाहिर है। उसे मैं यहां दोहराना नहीं चाहता। मेरा मानना है कि सड़कें, स्कूल, अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनाना सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार ये काम नहीं करेगी तो और क्या करेगी? हकीकत यह है कि समाजवादी पार्टी की सरकार में जितने अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और तकनीकी शिक्षण संस्थान बनाए गए थे, उनमें यह सरकार स्टाफ तक तैनात नहीं कर पाई है।
सवाल: भाजपा का तो दावा है कि सभी वादे उसने पूरे किए हैं?
जवाब: वर्ष 2014, 17 और 2019 के चुनाव में जो वादे किए थे, उनमें से कोई भी पूरा किया हो तो बताइए। सर्वे कर लीजिए, सामने आ जाएगा कि गांवों, कस्बों और शहरों के लोग अब इनकी बातों पर भरोसा नहीं करते हैं। भाजपा और उसकी सरकार, दोनों अपना भरोसा खो चुकी हैं। आने वाले चुनाव में यह साबित भी हो जाएगा।
सवाल: गरीबों को आवास देने की योजना का तो तत्कालीन सपा सरकार भी खूब प्रचार करती थी?
जवाब: लोहिया आवास के लिए हम 3.27 लाख रुपये देते थे। प्रदेश में बड़ी संख्या में गरीबों को छत दी। यह तो एक कमरा देकर उसे आवास का नाम दे रहे हैं।
सवाल: मुलायम सिंह और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा में क्या अंतर महसूस करते हैं?
जवाब: हर पिता और उसके पुत्र में कुछ न कुछ अंतर होता है। यह सार्वभौमिक सत्य है। अखिलेश यादव जैसा नेता आज हिंदुस्तान में कोई दूसरा नहीं है। अखिलेश की रैलियों ने यह साबित कर दिया है। लोग तड़के ही सपा अध्यक्ष की रैलियों में पहुंच जाते हैं, ताकि अगली पंक्तियों में जगह मिल सके।
सवाल: सपा सरकार पर कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए कारगर कदम न उठाने के आरोप लगते रहे हैं?
जवाब: 56 लाख गरीब महिलाओं को समाजवादी पेंशन किसने दी? 1090 के माध्यम से पांच मिनट के भीतर मां-बहनों को मदद कौन पहुंचाता था? 100 नंबर से राहजनी, लूटपाट और डकैती पर हमारी सरकार ने ही अंकुश लगाया था। 108 एम्बुलेंस हर मरीज को अस्पताल पहुंचाती थीं। यह सरकार तो उन गाड़ियों के टायर तक नहीं बदलवा पाई। हमारी सरकार ने 45 जिले फोरलेन सड़कों से जोड़े थे। रिकॉर्ड सड़कें बनवाई थीं। कन्या विद्या धन भी हमारी सरकार ने ही दिया था।
सवाल: सपा पर सामान्य वर्ग की उपेक्षा का आरोप लगता है?
जवाब: ऐसा कतई नहीं है। सपा सामाजिक न्याय की बात करती है। सभी को उनकी आबादी के अनुपात में हक मिलना चाहिए। सामान्य वर्ग के लिए भाजपा सरकार ने गरीबी रेखा आठ लाख रुपये तय की है, जबकि पिछड़ों और अनुसूचित जाति के लिए ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में 46 हजार व 56 हजार रुपये की सीमा तय की है। यह अन्याय नहीं तो क्या है?
सवाल: लोकसभा चुनाव के लिए आपके भाजपा में जाने की चर्चा है?
जवाब: मेरे विरोधी हर चुनाव में इस तरह की अफवाहें उड़ाते हैं। अगर मुझे लोकसभा चुनाव लड़ना होगा तो अपनी पार्टी से क्यों नहीं लड़ूंगा। मेरा जीना-मरना सपा के साथ है और सपा के साथ ही रहेगा।