मायावती ने कहा कि कांशीराम जी ने बाबा साहब के अधूरे कारवां को पूरा करने में अपना जीवन लगा दिया। बाबा साहब ने कहा था के सत्ता की मास्टर चाभी हमें अपने हाथ में लेनी है। कांशीराम जी के देहांत से पहले उनकी दिली तमन्ना थी के दलितों की संख्या के हिसाब से यहां उन्हें एकजुट होकर अपनी खुद की सरकार बनानी चाहिए। दुख की बात है कि उनके जीते जी ये सपना पूरा नहीं हो सका था। मेरे और मेरे परिवार को जानबूझकर फर्जी केस में फंसा कर छवि धूमिल करने का प्रयास किया था। हमारी इकलौती सरकार बनाना सपा, भाजपा, कांग्रेस किसी को अच्छा नहीं लगा। हमारी पार्टी की रही सरकार ने दलितों और उपेक्षितों का ध्यान रखा, आरक्षण का लाभ दिया।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने जाति और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कानून व्यवस्था के लिए काम किया। अन्याय, अपराध और भयमुक्त वातावरण हमने बनाया था। केंद्र की सरकार की तरह हमने इन्हीं के टैक्स के पैसे से इन्हें थोड़ा मुफ्त का राशन देकर अपना गुलाम नहीं बनाया है। समाजवादी पार्टी अपने राजनीतिक स्वार्थ में पीडीए की बात पर इन्हें गुमराह करने में लगी है। हमारे महापुरुषों के सम्मान में बनी योजना सपा सरकार ने बंद कर दी थी। इमरजेंसी के वक्त कांग्रेस ने बाबा साहब के बनाए संविधान को प्रभावहीन बना दिया और अब संविधान हाथ में लेकर किस्म किस्म की नौटंकी करते हैं। इन्होंने कभी बाबा साहब को भारत रत्न नहीं दिया। ना कांशीराम जी के देहांत पर राष्ट्रीय शोक घोषित किया। मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू नहीं की।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब बसपा की सरकार लाना जरूरी है। यूपी में अपनी पार्टी बीएसपी की अकेले पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना है। बीएसपी के 2007 में अकेले सरकार में आने पर सभी जातिवादी पार्टियों को डर था के हम केंद्र तक पहुंच सकते हैं और उसी कारण उसके बाद हुए सभी चुनाव में कांग्रेस, बीजेपी और सपा सभी ने अंदर अंदर एकजुट होकर इन्होंने बीएसपी को जीतने नहीं दिया। रही सही कमी ईवीएम में की गई धांधली से इन्होंने पूरी कर दी जो कभी भी खत्म हो सकता है। बैलेट वाला सिस्टम लागू हो सकता है।
बीएसपी को कमजोर करने के लिए विरोधी पार्टियों ने दलित समाज से स्वार्थी और बिकाऊ किस्म के लोगों का इस्तेमाल कर पार्टी और संगठन बना दिए हैं। ऐसे लोगों के चक्कर में पढ़कर अपना एक भी वोट खराब नहीं करना है। पार्टी के लोगों को सचेत करने के लिए कहना चाहूंगी के दुनिया के कई देश हिंसा में फंसे हैं, ऐसा माहौल देश में बनने से पहले केंद्र और राज्य सरकार ने उसे नियंत्रित किया है। एक दूसरे के देवी देवता और खुदा पर निकलने वाले नए नए मुद्दों की आड़ में बवाल करने की कोशिश और देश का माहौल खराब करना देश हित में नहीं है। सबको एक दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए, आई लव आदि की राजनीति भी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहलगाम की घटना रोकी जा सकती थी अगर वहां सुरक्षा का उचित प्रबंध होता। हमारी विदेश नीति में जनहित होना चाहिए। देश को आत्मनिर्भर बनाने की बात हवाहवाई ना हो तो हम भी इसका स्वागत करेंगे।
मायावती ने कहा कि भाजपा, कांग्रेस, सपा के राज में दलितों का उत्थान नहीं हो सकता है। मुसलमानों का जान, माल और मजहब भी खतरे में है। यूपी सहित देश में कानून व्यवस्था भी अच्छी नहीं है। चुनाव से पहले के ये पचास फीसदी वादे भी लागू नहीं करते हैं। सत्ता और विपक्ष आपस में मिलकर बाबा साहब के संविधान को बदलकर जातिवादी ढांचे में परिवर्तित करना चाहते हैं जिसे इनके साधु संत भी पैरवी करते हैं जिसे हम कामयाब नहीं होने देंगे। उन्होंने समर्थकों का आह्वान करते हुए कहा कि हर पोलिंग बूथ पर छोटी छोटी बैठक कर बीएसपी से लोगों को जोड़िए।
जब भी यूपी में हमने गठबंधन करके लड़ा है तब हमें लाभ नहीं हुआ। हमारा वोट तो ट्रांसफर होता है लेकिन सामने वाली पार्टी का वोट नहीं मिलता। सरकार बन भी जाए तो सरकार गिर जाती है। इसलिए हमने इस बार अकेले लड़ने का फैसला किया है। हमारे आज के कार्यक्रम के घोषित होते ही अफवाह फैलाना शुरू कर दिया गया कि दूसरी पार्टी के नेता आज हमारी पार्टी में शामिल हो रहे हैं और मेरी मुलाकात की खबर भी झूठी चल रही थी। मैं किसी से चोरी छुपे नहीं मिलती हूं जिससे मिलती हूं सामने मिलती हूं।
मायावती ने कहा कि आज की भीड़ ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बसपा के लोग दूसरी पार्टियों की तरह भाड़े पर नहीं आए बल्कि अपने खून पसीने की कमाई खर्च कर आए हैं। हमारी सरकार आने पर जातिवादी नियम और कानूनों की समीक्षा कर हम उन्हें खत्म करेंगे।
कहा कि हमारी सरकार आने पर यूपी के लोगों को रोटी रोजी के मामले में पलायन नहीं करना होगा। सबको यहीं रोजगार मिलेगा। आकाश आनंद भी अपनी पूरी लगन और मेहनत से लगे हैं, जिससे पार्टी के लोगों का इनके प्रति लगाव और उत्साह बढ़ रहा है। मैं ये चाहूंगी के पार्टी के लोग आकाश आनंद के साथ वैसे ही बने रहें जैसे वो मेरे साथ बने रहे हैं। आनंद कुमार, सतीश मिश्रा, उमाशंकर सिंह, विश्व नाथ पाल इन सभी को इनके समाज को जोड़ने की जिम्मेदारी हमने दी है।