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गौरी हत्याकांड खुलासे पर पुलिस ने किया 'खेल'

Mon, 09 Feb 2015 11:36 AM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
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गौरी हत्याकांड के खुलासे में पुलिस अपनी पीठ थपथपाती रही। एसटीएफ को क्रेडिट देने से भी पुलिस बचती रही। जबकि शनिवार देर शाम तक खाली हाथ रही लखनऊ पुलिस को एसटीएफ ने गौरी को साथ ले जाने वाले युवक की मोटर साइकिल का नंबर बताया। एसटीएफ को यह नंबर दिल्ली की एक कंपनी से हासिल हुआ। इसी के बाद पुलिस एक्शन में आई।
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हालांकि, प्रेस वार्ता में डीजीपी एके जैन से लेकर एसएसपी यशस्वी यादव तक ने यही दावा किया कि सारी कामयाबी लखनऊ पुलिस की रही, जिसने बड़ी मशक्कत से केस सुलझाया। वार्ता के दौरान जहां यशस्वी यादव ने इस खुलासे में एसटीएफ का कोई रोल होने के बारे में एक वाक्य नहीं कहा वहीं डीजीपी ने अपने संबोधन के दौरान इतना ही कहा कि इस केस में एसटीएफ भी लगी थी।

नृशंसता की वजह से यह कांड यूपी पुलिस के साथ ही सरकार के लिए चुनौती बन गया था। लखनऊ पुलिस इसमें कठघरे में खड़ी थी। ऐसे में सीएम ने भी अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने सीनियर अफसरों को बुलाकर फटकारा था और मामले का जल्दी खुलासा करने के लिए इसमें एसटीएफ को लगाने के निर्देश दिए थे।
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आईपीएस अफसर की मुख्यमंत्री से नजदीकी भी एक वजह

मुख्यमंत्री की नाराजगी के साथ ही यह संदेश साफ था कि वे इस कांड में लखनऊ पुलिस के सिर नाकामी का ठीकरा नहीं देखना चाहते थे। कारण यह भी है कि लखनऊ में तैनात एक आईपीएस अफसर की मुख्यमंत्री आवास तक की नजदीकी किसी से छिपी नहीं है।

ऐसे में एसटीएफ मामले की तफ्तीश में लगी तो, लेकिन डीजीपी एके जैन से लेकर एसटीएफ के अफसर भी यही कहते रहे कि वे सिर्फ जांच में मदद कर रहे हैं और जो भी कर रही है लखनऊ पुलिस कर रही है।

खूब हाथ-पैर मारे पर आगे नहीं बढ़ सकी पुलिस
हकीकत यह है कि लखनऊ पुलिस केस की तह तक पहुंचने की कोशिश तो कर रही थी, लेकिन उसकी पड़ताल सिर्फ सीसीटीवी फुटेज और गौरी के मित्रों के इर्द-गिर्द सीमित थी।

पुलिस ने बहुत हाथ-पैर मारे लेकिन सीसीटीवी फुटेज से उसे सिर्फ मोटर साइकिल सवार युवक का अस्पष्ट हुलिया ही हाथ लग सका। इसके अलावा गौरी के मोबाइल फोन की टावर लोकेशन के लिहाज से वह किस समय किस क्षेत्र में थी, इतना ही पता कर सकी थी।
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...और एसटीएफ ने पुलिस को बता दिया नंबर

शनिवार को एसटीएफ काफी देर तक मशक्कत करने के बाद भी मोटर साइकिल की नंबर प्लेट का नंबर पढ़ने में सफल नहीं हो सकी तब उसने एक केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों से संपर्क किया।

इस एजेंसी के अफसरों ने एसटीएफ को दिल्ली की एक टेक्निकल एक्सपर्टीज वाली कंपनी ‘सिरीन’ के बारे में जानकारी दी। एसटीएफ को पता चला इस कंपनी के पास नंबर प्लेट इनहैंसमेंट सिस्टम का विदेशी सॉफ्टवेयर है, जिसकी मदद से दूर से लिए गए वाहनों के फोटोग्राफ से उनके नंबर जानने में कामयाबी मिल सकती है।

सूत्रों के मुताबिक शनिवार शाम को एसटीएफ ने नंबर का पता लगाया। पर एसटीएफ के आला अफसरों ने ऊपर की मंशा को समझते हुए आपस में विमर्श किया और खुलासे की कुंजी लखनऊ पुलिस को सौंप दी गई।
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