सोशल मीडिया एक बार फिर जहर फैलाने वालों का नया हथियार साबित होने लगा है। ट्विटर और फेसबुक पर जहां यह जहर खुलेआम फैलाया जा रहा है, वहीं वॉट्सएप पर ग्रुप बनाकर झूठी बातें दबे-छिपे ढंग से फैलाई जाने लगी हैं।
हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस RSS_Org पेज को फॉलो करते हैं, उस पर रविवार को समुदाय विशेष के लोगों से अपनी ताकत दिखाने के लिए हथियार जमा करने का आह्वान किया जा रहा है।
साथ ही ढाका में गोवध की तस्वीर डालकर एक धर्म के सर्वधर्म समभाव पर सवालिया निशान लगाया जा रहा है। ऐसे तमाम ग्रुप सक्रिय हो चुके हैं जिन्होंने दादरी में हत्या को लेकर ऐसी तस्वीरे साझा कीं जिनमें दो लाशें जमीन पर पड़ी थीं।
इसे मृतक और उसके बेटे की देह बताते हुए दूसरे समुदाय द्वारा की गई हिंसा का नतीजा बताया गया। इस बीच कई वीडियो, फेसबुक, वॉट्स एप व ट्विटर साझा किए गए जिनमें गोवध दर्शाया गया था और इसे दादरी कांड से जोड़ दिया गया।
यूपी में लगातार फैलाई जा रही अफवाहें
दादरी, नोएडा : दादरी में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोली से घायल राहुल यादव के लिए अफवाहें उड़ाई जा रही हैं कि उसे दूसरे समुदाय के युवक ने गोली मारी जिसके बाद दादरी कांड हुआ।
मुजफ्फरनगर : 2013 में यहां दंगों के दौरान एक भाजपा नेता पर कथित तौर पर पाकिस्तानी वीडियो संदेश वॉट्स एप के जरिये फैलाने का आरोप लगा। इस वीडियो में दो लड़कों की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। इसे कवाल में हुई हत्याओं का वीडियो बताकर दंगे भड़काए गए।
सहारनपुर : दो दिन पहले कई ट्विटर और फेसबुक प्रोफाइल पर एक सब इंस्पेक्टर के ट्रक से कुचले हुए शव की तस्वीरें फैलाकर धार्मिक उन्माद भड़काने की कोशिश की गई। इस बारे में झूठ फैलाया गया कि गाय के तस्करों को रोकने की कोशिश पर उसे ट्रक ने कुचल दिया। इस पर उप्र सरकार के ट्विटर हैंडल ने तुरंत सक्रिय होकर स्पष्ट किया कि यह सब इंस्पेक्टर खनन माफिया को रोकते हुए कुचला गया है। पुलिस ने ट्विटर यूजर महिला पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
बहराइच : इसी वर्ष जनवरी में बहराइच के नानपारा में वॉट्स एप के जरिये धर्म विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री फैलाई गई, जिससे तनाव की स्थिति बन गई। एफआईआर दर्ज होने के बाद एसपी ने इस मामले में एक युवक को गिरफ्तार किया।
आगरा : चार सप्ताह पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर आगरा के शमसाबाद क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव फैला। इस पोस्ट में एक समुदाय विशेष की आलोचना की गई। इसके बाद सैकड़ों लोगों ने सड़क पर उतरकर आगजनी और पुलिस पर पथराव किया।
लखनऊ : राजधानी में आज भी वॉट्स एप के जरिये भड़काऊ सामग्री फैलाने की शिकायतें साइबर सेल में की जा रही हैं। अगस्त 2012 में कुछ झूठी तस्वीरें दिखा कर म्यामांर में एक समुदाय विशेष पर अत्याचारों की अफवाह फैलाई गई। इसके बाद 500 से अधिक दंगाइयों ने शहर में हाहाकार मचा दिया।
यूपी में तीन गुना बढ़े साइबर अपराध
उप्र में 2013 के मुकाबले 2014 में साइबर अपराध तीन गुना बढ़ा है। इस मामले में यूपी देश में महाराष्ट्र के बाद दूसरे स्थान पर रहा। इसमें बहुत बड़ी संख्या धारा 66-ए के तहत मामलों की है, लेकिन यह धारा अब खत्म की जा चुकी है।
इसके तहत यूपी में कुल 898 मामले दर्ज हुए जो कुल साइबर क्राइम के मामलों का लगभग 52 प्रतिशत है।
उसके बाद कर्नाटक का नंबर था जहां 603 मामले दर्ज हुए। साइबर अपराधों के लिए 2014 में देश में कुल 5,752 लोगों को गिरफ्तार किया गया, इनमें से 1,223 गिरफ्तारियां अकेले यूपी से की गईं। महाराष्ट्र 942 गिरफ्तारियों के साथ दूसरे स्थान पर है।
सुप्रीम कोर्ट ने धारा 66-ए को खत्म कर दिया है। यानी अब मामले दर्ज करना पुलिस के लिए संभव नहीं रहा। लखनऊ के साइबर लॉ एक्सपर्ट श्रीकांत वाजपेयी बताते हैं कि धारा 66-ए से पुलिस को सीधे तौर पर ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिलती थी जो कंप्यूटर के जरिये ऐसी जानकारियां और सामग्री फैलाते हैं जिससे समाज में नफरत को बढ़ावा मिले। यह जानकारियां झूठी होती हैं।
इसे देखकर लोग भड़क सकते हैं, असहज महसूस कर सकते हैं। ऐसी सामग्री में किसी के प्रति नफरत, दुश्मनी व नुकसान पहुंचाने की भावना होती थी। वाजपेयी बताते हैं कि इस धारा में आरोप साबित होने पर दोषी को दो से तीन वर्ष की जेल का प्रावधान था। यह धारा पुलिस को कार्रवाई के लिए मजबूत हथियार मुहैया कराती थी लेकिन अब वह खुद को कमजोर महसूस कर रही होगी।