कोरोना से जिंदगी सहमी जरूर थी। भय से ठहरी भी थी। पर, अनलॉक के बाद धीरे-धीरे लोगों ने डर को जीत लिया। वक्त के साथ सोच बदली। जिंदगी फिर पटरी पर है। सरपट। अपनी ही धुन में। अपने ही रंग में। वो भी तब जब कोरोना की भी गति तेज है। बदलाव जरूर आए। परिस्थितियों से दो-दो हाथ करने के लिए बदलाव तो करने ही पड़ते हैं। कोरोना काल के छह महीने 24 सितंबर को पूरे हो जाएंगे। इन छह महीनों में ठहराव के पड़ाव को पार कर जिंदगी ने कैसे रफ्तार पकड़ी, हमारी जिजीविषा कैसे चीजों को बदल रही है, इन सबको दर्शाती खास रिपोर्ट...।
विज्ञापन
2 of 12
बाजारों में लौटी रौनक
- फोटो : amar ujala
लखनऊ में छह माह पहले लॉकडाउन से थमी जिंदगी ने अब रफ्तार भर ली है। स्थितियां सामान्य दिनों जैसी तो नहीं हुईं, लेकिन अनलॉक-3 के मुकाबले 4 में शहर में आवागमन चार गुना बढ़ गया है। परिवहन निगम की बसों का 90 फीसदी बेड़ा भी सड़कों पर उतर चुका है। ट्रेनें जरूर अभी काफी कम हैं, लेकिन व्यस्त रूटों पर इनकी संख्या भी बढ़ रही है। एक से दूसरे शहर के लिए आवागमन बढ़ा है और करीब 80 फीसदी तक गाड़ियां हाईवे पर दौड़ने लगी हैं। बाजार खुल गए हैं और लोग भी खरीदारी को पहुंच रहे हैं। अधिकमास के बाद शुरू हो रहे नवरात्र और आ रही सहालग से लोग उत्साहित हैं। सांस्कृतिक आयोजनों की अनुमति मिलने से संस्कृतिकर्मियों को कुछ राहत मिली है। हालांकि, शैक्षिक संस्थान, सिनेमाघर खुलने का इंतजार है। होटल, रेस्टोरेंट भी गुलजार नहीं हो सके हैं, पर सबको उम्मीद है कि आने वाले दिनों में जिंदगी पूरी रौ में होगी। लॉक-अनलॉक के छह माह पूरे होने पर आइए जानते हैं कि कैसे सब कुछ थमने के बाद पटरी पर लौट रहा है।
विज्ञापन
3 of 12
सड़कों पर वाहनों की लंबी कतार
- फोटो : amar ujala
यातायात: सड़कों पर चार गुना बढ़े वाहन
कहने को तो अभी सड़कों पर कोरोना काल से पहले जैसी वाहनों की भीड़ भले ही न दिख रही हो, लेकिन अनलॉक-3 से तुलना करें तो चार गुना अधिक आवागमन बढ़ा है। राजधानी की सड़कों पर सामान्य दिनों में एक दिन में औसतन तीन से चार लाख गाड़ियां दौड़ती थीं, लेकिन लॉकडाउन में यह आंकड़ा करीब एक प्रतिशत रह गया था। अनलॉक-2 में सख्ती होने से कम लोग ही निकल रहे थे, लेकिन अनलॉक-3 में वाहन खुलेआम फर्राटे भरते नजर आए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक धीरे-धीरे औसतन प्रतिदिन 80 हजार से डेढ़ लाख वाहन सड़कों पर निकलने का अनुमान था, लेकिन यह आंकड़ा अनलॉक-चार में करीब तीन लाख के आसपास पहुंच गया। माना जा रहा है कि इस दौरान सरकारी दफ्तरों में काम ने रफ्तार पकड़ी तो सड़कों पर वाहनों का दबाव भी बढ़ा। अब हजरतगंज जैसे व्यस्त मार्गों में रेड लाइट पर वाहनों की कतार लंबी होने लगी है।
फैक्ट फाइल
सामान्य दिनों में प्रतिदिन तीन से चार लाख गाड़ियां दौड़ती थीं
लॉकडाउन होने पर एक प्रतिशत रह गया था यह आंकड़ा
अनलॉक चार में करीब तीन लाख के आसपास पहुंची संख्या
4 of 12
स्टेशन पर यात्रीगण
- फोटो : amar ujala
रेलवे: 16 ट्रेनें शुरू हुईं लखनऊ से, क्लोन ट्रेनें भी बढ़ीं
सड़क परिवहन की तुलना में ट्रेनों का संचालन बहुत धीमा है। रेलवे ज्यादातर डिमांड वाले रूटों पर ही ट्रेन चलवा रहा है। इसी रफ्तार में ट्रेनों में सफर करने की झिझक भी टूट रही है। लखनऊ से सामान्य दिनों में 282 ट्रेनें रोजाना चारबाग व जंक्शन पर आती-जाती थीं। 1,75,000 यात्रियों का इनसे आवागमन होता था। लॉकडाउन के बाद शुरुआत में लखनऊ से पुष्पक, लखनऊ मेल व गोमती एक्सप्रेस सहित कुल 18 ट्रेनें चल रही थीं। करीब 12 से 15 हजार यात्री रोजाना सफर करते थे, लेकिन अब संख्या बढ़ी है। अनलॉक-4 में 12 सितंबर से शताब्दी, एसी स्पेशल, हमसफर सहित 16 ट्रेनें लखनऊ से चलनी शुरू हो चुकी हैं। इनसे 20 से 25 हजार यात्रियों का आगमन होता है। यही नहीं 10 क्लोन स्पेशल ट्रेनें भी 21 सितंबर से चलनी शुरू हुई हैं। इनसे औसतन 6000 यात्री रोजाना सफर कर रहे हैं। फैक्ट फाइल
सामान्य दिनों में 282 ट्रेनें रोजाना आती-जाती थीं, 1,75,000 यात्री करते थे सफर
लॉकडाउन के बाद 18 ट्रेनों का शुरू हुआ संचालन, 12 से 15 हजार यात्री चले
अब 16 ट्रेनें चल रही हैं लखनऊ से, 20 से 25 हजार लोग कर रहे हैं यात्रा
विज्ञापन
5 of 12
आलमबाग बस टर्मिनल
- फोटो : amar ujala
परिवहन
24,00,000 तक यात्री कर सकते हैं अनलॉक-4 में सफर
अनलॉक होती जिंदगी में आम जन ने भी संक्रमण का मुकाबला करते हुए सफर शुरू किया। बात परिवहन निगम की करें तो लखनऊ में अनलॉक-3 यानी अगस्त की 1 से 15 तारीख के मुकाबले अनलॉक-4 में 15 सितंबर तक बस में सफर करने वालों की संख्या ढाई लाख तक बढ़ गई। उम्मीद है कि इस महीने के अंत तक पिछले माह के मुकाबले पांच लाख अधिक यात्री सफर करने लगेंगे। सामान्य दिनों में राजधानी से रोजाना 700 बसों का संचालन होता था। लॉकडाउन में बसें बंद हुईं। अब पुरानी रौ में लौटते हुए 600 बसें रोजाना चल रही हैं। लखनऊ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक पीके बोस ने बताया कि अगस्त में लगभग 19 लाख यात्रियों ने बसों में सफर किया था। सितंबर में 15 तारीख तक ही 12,40,745 यात्री सफर कर चुके हैं। ऐसे में 16 से 30 सितंबर तक यह संख्या 24 लाख से अधिक होने की उम्मीद है।
75% तक पहुंचा ऑटो का संचालन
लखनऊ ऑटो रिक्शा थ्री व्हीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज दीक्षित ने बताया कि अगस्त के मुकाबले सितंबर में ऑटो और टेंपो का संचालन 75% तक पहुंचा है। लॉकडाउन से पहले रोजाना 5000 ऑटो और 3000 टेंपो सवारियां ढो रही थीं। अनलॉक शुरू होने के बाद 5000 ऑटो में से अगस्त में 2500 दौड़ने लगे। सितंबर में 3750 का संचालन हो रहा है। इसी प्रकार 3000 टेंपो में से अगस्त में 1500 का संचालन हुआ और अब 2250 टेंपो सवारी ढो रहे हैं। हालांकि, ऑटो और टेम्पो को लॉकडाउन से पहले की तरह सवारियां नहीं मिल रही हैं। खास तौर पर लोग टेंपो में बैठने से परहेज कर रहे हैं।
विज्ञापन
6 of 12
खरीदारी करते लोग
- फोटो : amar ujala
80% तक ट्रैफिक लोड लौटा हाईवे पर
शहर से जुड़ने वाले पांच नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक लोड 80 प्रतिशत तक लौट आया है। इनमें से सबसे अधिक ट्रैफिक कानपुर हाईवे पर है, जहां रोजाना 40 हजार से अधिक वाहन गुजर रहे हैं। यह कोरोना से पहले की तुलना में करीब 90 प्रतिशत है। इसके अलावा सीतापुर, रायबरेली, सुल्तानपुर और अयोध्या हाईवे पर 70 से 80 प्रतिशत तक वाहन टोल प्लाजा से गुजर रहे हैं। एनएचएआई के अधिकारी ने बताया कि कोरोना की वजह से निजी वाहनों का उपयोग बढ़ा है। नवंबर तक वाहनों की संख्या कोरोना से पहले की तुलना में और अधिक हो सकती है। ऐसे में टोल प्लाजा पर सुविधाएं भी बढ़ानी होंगी।
लौटने लगी सराफा की चमक
लखनऊ सराफा एसोसिएशन के संगठन मंत्री आदिश जैन कहते हैं कि नुकसान की भरपाई तो संभव नहीं है। इसके बावजूद कारोबारी इससे संतुष्ट हैं कि गाड़ी धीरे-धीरे ही सही पटरी पर आने लगी है। सोने की गिरती कीमतें और नवरात्र के शुभ दिन की शुरुआत, सहालग और फिर दिवाली की आमद ने उम्मीदें जगा दी हैं। कहना गलत नहीं होगा की 60 फीसदी तक कारोबार शुरू हो चुका है, बाकी की भरपाई साल के अंत तक हो जाएगी।
विज्ञापन
7 of 12
ऑटो सेक्टर, ब्यूटी इंडस्ट्री
- फोटो : amar ujala
ऑटो सेक्टर मना रहा त्योहार
एक से एक नई और बड़ी गाड़ियां लॉन्च हो रहीं हैं। आफरों की भरमार है। लोग पुरानी गाड़ियों को निकाल रहे हैं और नई गाड़ियां बुक करा रहे हैं। चार पहिया हो या दो पहिया वाहन, ऑटो सेक्टर में 50 फीसदी से ज्यादा बुकिंग की बात कही जा रही है। पुनीत ऑटो मोबाइल के वैभव मिश्रा कहते हैं कि बाजार तो 50 फीसदी रिकवर कर गया है। यह बड़ी बात है कि इसी साल कारोबार में हुआ घाटा भी कवर हो जाएगा।
ब्यूटी इंडस्ट्री : रफ्तार थोड़ी धीमी है, बस नवरात्र का इंतजार
लकमे सैलून और एकेडमी की डायरेक्टर अनिता मिश्रा कहती हैं कि महामारी की छाया से ब्यूटी इंडस्ट्री अभी नहीं निकल पाई है। रेगुलर सर्विस भी अभी पूरी तरह से शुरू नहीं हो सकी है। सोशल डिस्टेंसिंग के कारण लोग अभी मिलना-मिलाना कम कर रहे हैं। ऐसे में यदि हम यह कहें कि मुश्किल से 30-40 फीसदी ही मार्केट चला है तो गलत नहीं होगा। दरअसल, इस काम में लोगों का संपर्क बहुत करीब से होता है और यही वजह है कि सारे इंतजाम के बावजूद लोगों में अभी डर बरकरार है।
कारोबार : कुछ ने पकड़ी रफ्तार, कुछ को त्योहारों से आस मोबाइल मार्केट : जरूरतों के चलते कोई असर नहीं
उत्तर प्रदेश मोबाइल फोन एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज जौहर कहते हैं कि लॉकडाउन में लोगों का वक्त मोबाइल फोन के बिना कटना मुश्किल हो जाता था। क्वारंटीन वालों के लिए मोबाइल ही सहारा था। ऑनलाइन एजुकेशन सिस्टम ने भी इसके कारोबार को गिरने नहीं दिया। हमें सप्लाई और मिली होती तो बिक्री और अच्छी होती।
भवन सामग्री बाजार 60 फीसदी पर पहुंचा
भवन सामग्री के बाजार में इन छह महीनों में मिला-जुला असर देखने को मिला है। होलसेल कारोबारी शिवकुमार तिवारी कहते हैं कि भवन सामग्री की बिक्री पूरी तरह कभी बंद नहीं रही। दरअसल, गांवों में लोगों ने अधूरे काम पूरे कराए। वर्तमान में 60 फीसदी तक बिक्री शुरू हो चुकी है। हालांकि, मांग कम हुई है।
इलेक्ट्रॉनिक : 75% धंधा खत्म
इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद कारोबारी मलय रस्तोगी व राजेश सडाना कहते हैं कि जिस दौरान स्टॉक जमा किया गया था, उस दौरान लॉकडाउन लगा। पीक सीजन के चार माह तो लॉकडाउन में निकल गए। स्टॉक रखा रह जाने से 75 फीसदी कारोबार तो उसी वक्त खत्म हो गया था। अनलॉक होने के बाद काम शुरू हुआ, लेकिन वर्तमान के हिसाब से सिर्फ 25 फीसदी ही बिक्री शुरू हो सकी है। अब अगले साल ही संभलेगा बाजार।
रेडीमेड बाजार : 25% तक उठा मार्केट
रेडीमेड गारमेंट के होलसेल कारोबारी अमरनाथ मिश्रा कहते हैं कि सिर्फ 25% कारोबार उठ सका है। रिटेल कारोबारी अशोक मोतियानी कहते हैं कि शादियों की वजह से ग्राहक मिल रहे हैं। पुरानी खरीदारी कर चुके लोग फिर से खरीदारी कर रहे हैं। ज्यादातर देन-लेन में रेडीमेड के बजाय सूट लेंथ व ड्रेस मैटेरियल को तवज्जो दी जाती है। कहा जा सकता है कि बाजार में 70 से 80 फीसदी ग्राहक वापस आ गए हैं और नवरात्र से दिवाली तक बाजार अपनी पुरानी रंगत में होगा।
10 of 12
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
बैंकों में लोन के लिए पहुंचने लगे लोग
कोरोना संक्रमण के बीच अनलॉक शुरू होने के साथ बैंकों की सेहत भी सुधरने लगी है। रिटेल सेक्टर खासतौर पर कार-बाइक, होम व एजुकेशन लोन की मांग बढ़ रही है। बैंकों में जहां कोरोना से पहले बनी मांग का 50 प्रतिशत तक लोन आवेदन आने लगे हैं, वहीं त्यौहारी सीजन शुरू होते ही बैंक इस आंकड़े के बढ़कर 70 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद कर रहे हैं। लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर विनोद बिहारी मिश्रा ने बताया कि रिटेल लोन के लिए मांग बढ़ गई है। घर और वाहन खरीदने के लिए सबसे अधिक मांग बनी हुई है। इसके बाद एजुकेशन लोन के लिए आवेदन मिल रहे हैं। इसकी वजह कॉलेजों में प्रवेश शुरू हो जाना भी हो सकता है। छोटे कारोबारियों के साथ अभी दिक्कत बनी हुई है। कुछ सेक्टर्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा बाजार की हालात अच्छी है। वहीं होटल, रेस्त्रां, सैलून जैसे सर्विस सेक्टर अब भी अच्छी स्थिति में नहीं हैं। जो सेक्टर्स खराब स्थिति में हैं, उनको अभी अपने लोन को दोबारा से रीस्ट्रक्चर कराने के लिए कहा जा रहा है। बैंक प्रबंधकों को निर्देश हैं कि छोटे कारोबारियों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए सहयोग करें।
7000 पटरी दुकानदारों को दिए लोन
लीड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार की पटरी दुकानदारों के लिए आई स्वावलंबन योजना में 10 हजार रुपये के लोन दिए जा रहे हैं। नगर निगम व डूडा की मदद से 12 हजार आवेदन मिले हैं। इनमें से लखनऊ में अब तक 7000 आवेदनों को अनुमति दी जा चुकी है। अधिकांश के खाते में पैसा भी पहुंच चुका है। ऐसे में वे कोरोना की वजह से आए संकट को दूर वह कर पाएंगे।
कोई लोन खाता एनपीए नहीं होगा
लीड बैंक ने सभी शाखा प्रबंधकों को निर्देश जारी किया हुआ है कि मार्च 2021 तक लोन खातों में अगर किस्त वापस नहीं आ पा रही है तो इन खातों को एनपीए नहीं किया जाए। कारोबारियों को पीएमईजीपी में 20 फीसदी तक की अतिरिक्त आर्थिक मदद देकर उनके कारोबार को बचाया जाए।
कोरोना से मौत दुर्घटना मानी जाएगी
बैंकों की तरफ से एक और राहत लोगों को दी गई है। कोरोना से होने वाली मौतों को दुर्घटना की श्रेणी में रखा गया है। ऐेसे में एक्सीडेंटल कवर लेने वाले लोगों को इसका क्लेम मिलेगा। इसका आवेदन बीमा कंपनी या बैंक को किया जा सकता है।
11 of 12
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Twitter
अनलॉक होते ही बढ़ गया अपराध
लॉकडाउन के दौरान खामोश शहर अनलॉक होने के बाद अशांत हो गया है। शहर की सड़कों पर वाहनों का शोर और लोगों की भीड़ पहले की तरह हो गई है तो अपराध का ग्राफ तीन गुना तक बढ़ गया है। धरना-प्रदर्शन होने से कानून व्यवस्था भी बेपटरी हो गई है। लॉकडाउन में बेहतरीन काम करके आम जनता में छवि बनाने वाली पुलिस के सामने अब साख बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। लॉकडाउन की शुरुआत 25 मार्च से हुई और चौथा चरण 31 मई को खत्म हुआ। इस दौरान राजधानी में अपराध लगभग खत्म हो गया। लूटपाट और चोरी की घटनाएं न के बराबर हुईं। हत्या और रेप की कुछ वारदात जरूर हुईं, जिनका खुलासा भी कर दिया गया। लॉकडाउन में धरना, विरोध-प्रदर्शन बंद थे, वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित थी, इसलिए कानून व्यवस्था और यातायात को लेकर कोई समस्या पेश नहीं आई। एक जुलाई से अनलॉक वन की शुरुआत की गई थी, जिसका चौथा चरण यानी अनलॉक फोर 30 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान बाजारों, प्रतिष्ठानों, कार्यालयों के खुलने से अपराध बढ़ने लगा। सड़क पर होने वाले लूट, छिनैती, चोरी और छेड़छाड़ जैसे अपराधों में लॉकडाउन के मुकाबले तीन गुना तक इजाफा हुआ।
अर्थव्यवस्था पटरी पर आने में लगेंगे अभी दो साल
- प्रो. एपी तिवारी, पूर्व विभ्ाागाध्यक्ष अर्थशास्त्र, डॉ. शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय
कोरोना काल में बिगड़ी अर्थव्यवस्था पूरी तरह संभलने में दो वर्ष तक का समय लग सकता है। हालांकि, जिंदगी अनलॉक होने के साथ ही आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ने लगी हैं। राजस्व में हो रही बढ़ोतरी से इसके संकेत मिल रहे हैं। फिर भी अभी कई क्षेत्रों में अर्थव्यवस्था अपनी पुरानी लय में नहीं लौटी है। उदाहरण के तौर पर नगरीय क्षेत्र का औद्योगिक उत्पादन अभी लगभग 50 फीसदी तक प्रभावित है। लॉकडाउन में घर गए मजदूरों के पूरी तरह से नहीं लौटने के चलते उत्पादन सुस्त है। वहीं, शिक्षा भी बेपटरी है। खेती के गति पकड़ने से ग्रामीण स्थिति में कुछ सुधार है। इसके अलावा मनरेगा में काम भी लोगों को मिला है, लेकिन हर हाथ को काम देने की बात अधूरी रहने से असर भी पड़ा है। आम आदमी की बात करें तो आय न संभलने या फिर संक्रमण काल से उपजी अनिश्चितता के कारण लोगों ने खर्च में कटौती की है। बुनियादी जरूरतों में कोई कमी नहीं, लेकिन गैर जरूरी चीजों से लोग बच रहे है।
आर्थिक गतिविधियां 30 फीसदी तक ठप
- प्रो. मनोज अग्रवाल, वरिष्ठ शिक्ष्ाक, अर्थशास्त्र विभाग, लखनऊ विवि
संक्रमण से मुकाबले के बीच आर्थिक गतिविधियां करीब 30 प्रतिशत तक प्रभावित हैं। शिक्षण संस्थाएं न खुलने से स्टेशनरी, ट्रांसपोर्ट से जुड़े व्यवसाय ठप हैं। सिनेमा बंद है और होटल, रेस्टोरेंट की हालत ठीक नहीं है। बड़े आयोजन नहीं हो रहे हैं। राजनीतिक, सामाजिक गतिविधियां प्रभावित हैं। लोग पहले जैसे मॉल घूमने नहीं निकल रहे हैं। फ्लाइट चालू हुई हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद हैं। ट्रेन संचालन दुरुस्त होना है, जिससे बहुत लोगों का रोजगार व आवागमन जुड़ा है। आर्थिक दृष्टि से कोरोना काल से पहले की स्थिति आने में अभी समय लगेगा। प्रो. अग्रवाल के अनुसार प्राइवेट सेक्टर में लोगों की नौकरी जाने के साथ आय भी प्रभावित हुई है। ऐसे में खर्च पर भी असर पड़ा है।