चूंकि सभी चुनावों में एक ही मतदाता है, इसलिए एक ही वोटरलिस्ट होनी चाहिए। भारत निर्वाचन आयोग की वोटर लिस्ट निकायों के नाम और उनके वार्डों के अनुसार बने और वोटरों को सेक्शंस में दर्ज किया जाए। स्थानीय निकायों का परिसीमन लोकसभा तथा विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन के साथ हो। 16 साल की आयु पर ही सभी नागरिकों के नाम डाटाबेस में दर्ज कराए जाएं। इससे 18 वर्ष पूरा होने पर उनका नाम वोटर लिस्ट में स्वत: आ जाए।