कैबिनेट मंत्री व राज्य सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह का कहना है कि जिन्नावाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का नया समाजवाद है। वैसे भी डॉ. राममनोहर लोहिया का समाजवाद सपा के लिए सिर्फ सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने का जरिया थी। उसके बाद से अपनी सुविधानुसार कथित समाजवादियों ने समाजवाद की कई नई परिभाषाएं रचीं। जिन्ना का समाजवाद इन सबमें नया है।
सिद्धार्थनाथ ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल से जिन्ना की तुलना कर अखिलेश ने न केवल सरदार पटेल बल्कि देश का भी अपमान किया। पटेल जिस समय रियासतों का एकीकरण कर एक और श्रेष्ठ भारत के निर्माण में लगे थे उस समय जिन्ना देश के बंटवारे की साजिश को अंजाम दे रहे थे। बंटवारे के बाद लाखों-करोड़ों लोगों को घर-बार छोड़ना पड़ा। तमाम लोग मारे गए। इस सबका दोष जिन्ना का है। तोड़ने वाले व्यक्ति से जोड़ने वाले की क्या तुलना?
सिद्धार्थ नाथ ने कहा कि दरअसल वोटों की फसल काटने के लिए तुष्टीकरण की राष्ट्रवादी राजनीति करना समाजवादी पार्टी का शगल है। इसी के चलते किसी समय सपा ने वाराणसी बम धमाके के आरोपियों की हाइकोर्ट में पैरवी की थी। तब हाईकोर्ट ने इस पर तल्ख टिप्पणी भी की थी।
जिन्ना ने भी लड़ी थी आजादी की लड़ाई : सिराज मेंहदी
विधान परिषद के पूर्व सदस्य सिराज मेंहदी ने कहा कि पूर्व मुख्य मंत्री अखिलेश यादव ने जिस संदर्भ मे जिन्ना का उल्लेख किया, उससे कोई इंकार नहीं कर सकता है। ब्रितानी हुकूमत के खिलाफ एक हिंदुस्तान परस्त सिपाही की तरह गांधी, नेहरू और पटेल की तरह जिन्ना ने भी लड़ाई लड़ी थी। इस इतिहास को झुठलाया नहीं जा सकता। बाद में कुर्सी की लालच में वह देश बंटवारा कराकर यहां के अल्पसंख्यक समाज को उनके हाल पर छोड कर चले गए।