संदीप की मौत होने की सूचना मिलते ही सैकड़ों राहगीरों ने अस्पताल व पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रिंग रोड पर जाम लगा दिया। करीब आधे घंटे तक हंगामा व प्रदर्शन चलता रहा। इस बीच सीओ गाजीपुर अवनीश्वर श्रीवास्तव, इंस्पेक्टर गाजीपुर, इंदिरानगर एसओ मुकुल प्रकाश वर्मा, गुडंबा इंस्पेक्टर रामसूरत सोनकर टीम संग मौके पर पहुंच गए। लोगों को समझाकर शांत कराया। इसके बाद जाम समाप्त हुआ। रिंग रोड से हटने के बाद राहगीरों ने अस्पताल में धावा बोल दिया। लेकिन पुलिस ने लोगों को खदेड़कर अस्पताल का मेन गेट बंद कराया। साथ ही अन्य थानों से भी फोर्स बुला ली गई।
इकलौता कमाने वाला था संदीप
संदीप की बहन रेखा की ससुराल जानकीपुरम में है। लोहिया अस्पताल पहुंची रेखा के मुताबिक, पिता गंगाराम यादव किसान है और संदीप इकलौता कमाने वाला था। परिवार में बहन मंजू, छोटा भाई प्रदीप, मां दर्शन देई, संदीप की पत्नी संध्या और तीन साल की बेटी नेहा है। रेखा ने बताया कि संदीप अपने साथ बैग लेकर चलता था। जो पुलिस को नहीं मिला है। आशंका है कि हमलावरों ने बैग लूटने के लिए ही गोली मारी है।
इंस्पेक्टर ने बताया कि सिक्योरिटी कंपनी के कर्मचारी निजी कंपनियों से सील बंद नकदी व बंद लिफाफा लेकर बैंक जाते हैं, जहां बैंककर्मी ही लिफाफा व सील बंद नकदी खोलते हैं। रुपये जमा होने के बाद ही कर्मचारियों को पता चलता है कि कितनी रकम जमा हुई। इसकी पर्ची वह कंपनी के कैशियर के पास जमा करवा देते हैं। युवक के दोस्त सर्वेश से पूछताछ की गई। पुलिस लूट व निजी कारणों को आधार बनाकर वारदात की जांच की जा रही है।
छह साल से करता था काम, आठ महीने पहले आया सर्वेश
इंस्पेक्टर ने बताया कि संदीप कंपनी में छह साल से काम कर रहा था। वहीं, बाराबंकी के कोतवाली निवासी सर्वेश आठ महीने पहले ही आया है। सर्वेश कंपनी की वैन चलाता है। पुलिस को संदेह है कि कंपनी के ही किसी ने तो ज्यादा रकम लेकर जाने की मुखबिरी तो नहीं की। इस बिंदु पर भी जांच की जा रही है। नकदी न मिलने पर बदमाशों ने संदीप को गोली मार दी हो। सर्वेश से संदीप के बैग के बारे में भी पूछताछ की गई है।