बृहस्पतिवार को विधायक गुड्डू जमाली के भी किनारा कर लेने के बाद बसपा में केवल चार विधायक रह गए हैं। चार बार सत्ता के शिखर तक पहुंची बसपा इस समय संकट में नजर आ रही है। दरअसल उसके अपने सिपहसालार लगातार पार्टी छोड़ छोड़कर दूसरे दलों में जा रहे हैं। उप्र विधानसभा चुनाव से ऐन पहले पार्टी में भगदड़ की स्थिति है। दस साल में पार्टी छोड़ने वाले महारथियों का सैकड़ा पार हो चुका है। इस समय पार्टी में बस चार विधायक ही रह गए हैं। श्याम सुंदर शर्मा, उमाशंकर सिंह, विनय शंकर तिवारी, आजाद अरिमर्दन फिलहाल पार्टी में सक्रिय विधायक रह गए हैं। अहम बात यह भी है कि बसपा के पिछले दो विधानमंडल दल नेताओं ने ही पार्टी छोड़ दी। ऐसे में अब यह भी सवाल खड़ा हो गया है कि अगला विधानमंडल दल का नेता किसे बनाया जाए। चर्चा इनमें से भी किसी के सपा या भाजपा में जाने की जोरों पर है।
19 में से रह गए चार
2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन खराब ही रहा था। कुल 19 सीटें बसपा ने जीतीं थी और इसमें भी एक सीट अंबेडकरनगर जिले के उपचुनाव में पार्टी हार गई थी। यानि पार्टी के पास विधायकों की संख्या 18 रह गई थी। पहले अलग-अलग समय पर पार्टी विरोधी गतिविधियों की बात कहकर 9 विधायकों को निलंबित किया गया। उसके बाद लालजी वर्मा और राम अचल राजभर का निष्कासन हुआ और दोनों ने ही सपा ज्वाइन कर ली। विधायक मुख्तार अंसारी को पार्टी भविष्य में चुनाव न लड़ाने का एलान कर चुकी है। उनकेभाई और भतीजे ने सपा का दामन थामा तो मायावती ने यह कदम उठाया। विधायक सुखदेव राजभर का निधन हो चुका है। ऐसे में बसपा के बसपा के पास बस चार विधायक ही रह गए हैं।
शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली के इस्तीफे पर बसपा की राज्य इकाई ने कहा है कि जमाली की कंपनी में काम करने वाली एक लड़की ने उन पर गंभीर आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। इसकी विवेचना चल रही है। इस घटना के बाद वे पार्टी पर लगातार दबाव बना रहे थे कि सीएम से कहकर मामले को रफा-दफा कराया जाए। इस पर पार्टी ने मना कर दिया था और कहा था कि बेहतर होगा कि यदि आपको विवेचना में न्याय नहीं मिलता है तो कोर्ट में जाएं। राज्य इकाई की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इससे नाराज जमाली ने कहा था कि यदि मेरी मदद नहीं की गई तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। इसी के चलते उन्होंने त्यागपत्र दिया है।
मुस्लिमों के साधने के लिए मायावती ने जमाली पर लगाया था दांव
पार्टी ने जून में जमाली को विधानमंडल दल का नेता तब बनाया था, जब पार्टी के तत्कालीन विधानमंडल दल नेता लालजी वर्मा ने बसपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया था। उन्हें निष्कासित कर जमाली पर दांव लगाकर बसपा ने मुस्लिमों को साधने की कोशिश की थी, पर यह समीकरण छह माह भी नहीं चल पाया।
118 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं जमाली
जमाली प्रदेश में सबसे अधिक चल-अचल संपत्ति वाले विधायक हैं। एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक जमाली के पास 118 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति है। इसमें 1.11 अरब की चल व 6.92 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है।