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सुविधाओं में नहीं, किराए में तेजस को टक्कर दे रही शताब्दी

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शताब्दी का किराया बढ़ गया, पर सुविधाए घट गईं। (फोटो प्रतीकात्मक) - फोटो : ??? ?????
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शताब्दी एक्सप्रेस किराए के मामले में तेजस के करीब पहुंच गई है। जबकि शताब्दी से कैटरिंग की सुविधा हटा दी गई है। फिर भी यात्रियाें को किराए में राहत नहीं मिल रही है। शताब्दी में अब पैकेज्ड फूड बिकने लगे हैं।
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मालूम हो कि कोरोना के बढ़ने पर रेलवे ने ट्रेनों से पैंट्रीकार में कुकिंग बंद कर दी थी। हालात सामान्य हुए तो पैकेज्ड फूड की सुविधा शुरू कर दी गई।
लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस के टिकट में कोविड से पहले कैटरिंग चार्ज शामिल रहता था। यह चेयरकार में 165 रुपये तथा एग्जीक्यूटिव अनुभूति क्लास में 185 रुपये था।
रेलवे ने जब कैटरिंग हटाई तो यह दर टिकट से भी घटा दी। शुुरुआत में टिकट सस्ता भी हुआ, लेकिन बाद में डायनेमिक फेयर के चलते टिकट की दर फिर से बढ़ने लगी।
अब तो शताब्दी का किराया तेजस के करीब पहुंचने को है। जबकि तेजस में हॉस्पिटेलिटी के साथ कैटरिंग भी मिलती है।
अब इतना हो गया है किराया
शताब्दी एक्सप्रेस की एसी चेयरकार का किराया 820 रुपये है। एग्जीक्यूटिव क्लास का किराया 1770 रुपये तथा अनुभूति कोच का 2095 रुपये है। जबकि इसमें कैटरिंग की सुविधा शामिल नहीं है। उस पर यात्री को ढाई सौ से तीन सौ रुपये अलग से खर्च करने पड़ते हैं। वहीं, तेजस एक्सप्रेस की चेयरकार का किराया 1248 रुपये व एग्जीक्यूटिव क्लास का 2321 रुपये है। इसमें कैटरिंग की सुविधा शामिल है।
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लापरवाही से बदहाल है शताब्दी
यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल ने बताया कि वीआईपी ट्रेन शताब्दी की अनदेखी की जा रही है। ऐसा लगता है कि तेजस को सफल बनाने के लिए शताब्दी को पीछे खींचा जा रहा है। जिस शताब्दी का किराया 600 से 1200 के बीच था, वह अब डायनेमिक फेयर के चलते 2000 से ऊपर पहुंच गया है।
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