ऐसे में जमीन अधिग्रहण की अनुमति प्राधिकरण को नहीं मिल रही थी। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना में जहां हमने शहीद पथ के लिए 120 करोड़ रुपये लिए। वहीं शहीद पथ केलिए 1100 एकड़ जमीन अधिग्रहित भी विशेष अनुमति लेकर की।
गोमतीनगर विस्तार शहीद पथ से बची करीब 900 एकड़ जमीन पर लांच किया गया जोकि अब नए लखनऊ के रूप में जाना जाता है। उनका कहना है कि शहीद पथ अकेली योजना उनके विकास के विजन को प्रदर्शित करने वाली नहीं है। इसके अलावा झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले 1800 परिवारों को शिफ्ट कर जानकीपुरम विस्तार में लांच की गई।
आश्रयहीन कॉलोनी में पांच, 10, 15 रुपये रोजाना की किश्तों में आवास देने का मॉडल उनके दिशा-निर्देश पर बना। उनके ही हाथों इन परिवारों को आवंटन पत्र देकर आवासों पर कब्जा दिलाया गया। यह स्लम विकास के लिए एक मॉडल की तरह था।
कॉलोनियों के अंदर 200 पार्कों का उन्होंने सौैंदर्यीकरण कराया। इनमें दीनदयाल पार्क, कैसरबाग बारादरी, बुद्धा पार्क, नींबू पार्क, स्वर्णजयंती पार्क, झंडेवाला पार्क शामिल रहे। ट्रैफिक सुधार वह हमेशा चाहते थे।
यही वजह रही कि सात नए फ्लाईओवर्स उन्होंने विवेकखंड गोमतीनगर, इंजीनियरिंग चौराहा, सदर क्रॉसिंग, आरडीएसओ, मवैया जैसी जगहों पर बनवाए। करीब 42 चौराहों का नए सिरे से उन्होंने विकास कराया।
गोमती नगर में हैनीमेन चौराहा
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दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि गोमती नदी में प्रदूषण रोकने के लिए पहली योजना वही लेकर आए। गंगा एक्शन प्लान-2 में उन्होंने करीब 400 करोड़ रुपये खर्च करके गऊ घाट से निशातगंज तक इंटरसेप्टर ड्रेन बनवाईं।
इसमें सरकटा, पाटा, घसियारी मंडी जैसे नालों को डायवर्ट कर नदी में गिरने से रोका। इस सीवर को ट्रीट करने के लिए भरवारा, दौलतगंज में एसटीपी बनवाए। कई पंपिंग स्टेशन बनाए गए। कुडियाघाट का विकास कराया गया। हालांकि, यह योजना अधिक आगे नहीं बढ़ सकी।
विनयखंड निवासी और विकास प्राधिकरण में योजना सहायक राम नायक सिंह का जुड़ाव अटल जी के लखनऊ से पहली बार सांसद चुने जाने के समय से रहा। उनका कहना है कि उस समय ही गोमतीनगर का विकास होना शुरू हुआ था।
वह यहां के विकास से काफी प्रभावित थे। इसी लिए जब भी उन्हें वक्त मिलता। वह खुद विनयखंड स्थित मिनी स्टेडियम में आकर लोगों से मिलते। उस समय यहां केवल पार्क हुआ करता था। लोग अपनी शिकायतें उन्हें बताते। परेशानी देखने के लिए वह लोगों के साथ उनकी गलियों तक में चले जाते। यह सिलसिला काफी लंबे समय तक चला।
पीएम नरेंद्र मोदी एवं गृहमंत्री राजनाथ सिंह
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‘अटल जी ने लखनऊ को देश के शहरी जीवन के सुधार की प्रयोगशाला बनाया था। लखनऊ में फ्लाईओवर्स, बायोटेक पार्क, साइंटिफिक कंवेंशन सेंटर उन्होंने बनवाए। लखनऊ से आसपास के गांवों को जोड़ने वाली जो सड़कें देख रहे हैं। यह उनका विजन था। अटल जी कहा करते थे कि बिना पुराने को संवारे नया भी नहीं संवरेगा। ये बात उन्होंने पुराने और नए लखनऊ के संदर्भ में कहीं थीं। यही आज के हमारे अमृत योजना के लिए आधार है। इसकी पूरा नाम अटल मिशन फॉर रिजूवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन है। स्मार्ट सिटी मिशन के लिए भी ये हमारी प्रेरणा है।’ - नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री (28 जुलाई 2018 इंदिरागांधी प्रतिष्ठान में)
‘लखनऊ के विकास की नींव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने रखी। उनकी इस विरासत को पूर्व सांसद लालजी टंडन ने आगे बढ़ाया। अब मैं लखनऊ का सांसद होने के नाते अटल जी की दिखाई राह पर आगे बढ़कर राजधानी के विकास के लिए काम कर रहा हूं। मेरी कोशिश रही है कि अटल जी केलखनऊ के विकास केलिए शुरू किए रथ को मैं आगे ले जा सकूं। इसी क्रम में नए फ्लाईओवर्स, आउटर रिंगरोड का निर्माण, गोमतीनगर रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण, कुकरैल-पिपराघाट पुलों की बाधा हटवाने का काम मैंने कराया।’
- राजनाथ सिंह, सांसद व केंद्रीय गृहमंत्री (5 अगस्त 2018 साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में)