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'मेट्रो जमीन से ऊपर चलेगी आग लगने पर क्या होगा'

Thu, 07 May 2015 01:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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‘लखनऊ की मेट्रो रेल जमीन से 15-20 मीटर ऊपर चलेगी, ऐसे में अगर कभी आग लग जाए तो बचाव के लिए क्या कोई तकनीक अपनाई जा रही है?’
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प्रदेश की फायर सर्विस के संयुक्त निदेशक प्रवेंद्र राव ने जब यह सवाल लखनऊ मेट्रो के प्रबंध निदेशक कुमार केशव से किया तो यह जानने की जिज्ञासा थी कि लखनऊ को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करते समय नागरिकों को बेहतर सुरक्षा कैसे मिलेगी।

कुमार केशव ने समझाया कि मेट्रो के स्टेशन 800 से 1000 मीटर की दूरी पर होंगे, फिर भी बीच रास्ते ट्रेन में आग लगने या किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों को कुछ ही मिनटों में नीचे उतारने की व्यवस्था रहेगी। हम इसके लिए पुख्ता इंतजाम करेंगे।
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शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए एजेंडा तय हो, इस विचार के साथ राजधानी में बुधवार को आयोजित कॉन्फ्रेंस ‘एजेंडा : नेक्स्टजेन सिटीज’ में कुछ इसी तरह के सवाल-जवाब हुए। इसमें प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

इसी महीने होगी स्मार्ट शहरों के नाम की घोषणा

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य सचिव आलोक रंजन ने किया। उन्होंने बताया कि इसी महीने देश के उन 100 शहरों के नामों की घोषणा होने जा रही है जिन्हें स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रदेश के कितने शहर इसमें शामिल होंगे, यह भी जल्द पता चलेगा।

कहा कि प्रदेश के शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लान, सड़कों और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारते हुए स्मार्ट सिटी बनाने पर जोर दिया जाएगा। शहरी नियोजन व आवास विभाग के प्रमुख सचिव सदाकांत ने बताया कि प्रदेश में स्मार्ट सिटी विकसित करने के लिए इंटीग्रेटेड तरीके अपनाए जाएंगे। यानी शहरों की मूल छवि को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

फिर भी उन्हें आधुनिकता से दूर नहीं रखा जाएगा। चर्चा के लिए इस सत्र की अध्यक्षता शहरी विकास मंत्रालय के पूर्व सचिव डॉ. सुधीर कृष्णा ने की। डिफेंस एंड पब्लिक सिक्योरिटी के अविनाश दुहेरा ने अपना प्रजेंटेशन दिया। यूएसटीडीए की प्रतिनिधि मेहनाज अंसारी ने भी अपने विचार रखे।

राजधानी को मिलेगा परिवहन का विकल्प

इस मौके पर एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने बताया कि मेट्रो रेल के जरिये शहर को स्मार्ट बनाने का प्रयास है। मेट्रो चलने से लखनऊ को परिवहन का विकल्प मिलेगा। बस सेवा को भी इससे जोड़ना होगा।

मेट्रो स्टेशनों पर फीडर के तौर पर बसों का उपयोग किया जाएगा। हर स्टेशन पर टिकट न खरीदना पड़े इसके लिए ऐसे ट्रैवल कार्ड जारी किए जाएंगे जिनसे बसों और मेट्रो दोनों की यात्रा का पैसा चुकाया जा सकेगा।

आवास बंधु, हाउसिंग व शहरी नियोजन विभाग के सलाहकार एनआर वर्मा ने कहा, स्मार्ट सिटी के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्मार्ट गवर्नेंस रहेगी। उन्हाेंने सुझाया कि स्मार्ट सिटी में समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत है।
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तालमेल की कमी से जनता को नहीं मिलता फायदा

योजना विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने कहा, शहरों में विकास तो हो रहा है, लेकिन समन्वय से काम नहीं होने से उसका फायदा जनता को नहीं मिल पाता। उन्होंने सड़कों की बात कही जिन्हें बनाने के कुछ समय बाद कभी जल निगम तो कभी दूरसंचार विभाग खोद देता है।

इलाहाबाद में पिछले कुंभ मेले का उदाहरण दिया जहां वह डीएम थे। बताया कि इलाहाबाद में बिना जिला प्रशासन की अनुमति के सड़कें खोदने पर अन्य विभागों को चेताया गया था।

इस नाते सड़कों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सका। सड़कें चौड़ी करने के लिए करीब 3000 पेड़ काटने की तैयारी इलाहाबाद में हो चुकी थी लेकिन निवासियों के नाखुशी जताने पर विभिन्न विभागों ने फिर से सर्वे कराया।

सामने आया कि अधिकतर पेड़ सड़कों के किनारे हैं जिन्हें काटने के बजाय छांव देने के लिए छोड़ा जा सकता है। इस वजह से 2000 पेड़ बच गए।
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