प्रदेश के कद्दावर मंत्री मो. आजम खां के विभाग में आने वाले अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम की हालत खस्ता हो गई है। अल्पसंख्यकों के कल्याण की योजनाएं करीब आठ सालों से बंद पड़ी हैं।
कर्मचारियों को इस महंगाई के जमाने में भी चौथा वेतनमान मिलता है, वह भी लोन की वसूली होने पर। प्रदेश सरकार भी निगम पर ध्यान नहीं दे रही है।
अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम का मुख्य उद्देश्य अल्पसंख्यकों का कल्याण करना है। इसका उद्देश्य यह कतई नहीं है कि इससे लाभ कमाया जाए। यही वजह है कि पहले यहां पर सब्सिडी पर कई तरह के लोन दिए जाते थे।
केंद्र सरकार से जब तक मदद आती रही प्रदेश सरकार ने इस निगम के जरिये खूब बांटा। लेकिन वसूली पर कोई ध्यान नहीं दिया। पिछले आठ वर्षों से यह सभी योजनाएं बंद हो गई हैं।
करोड़ों का इन्फ्रास्ट्रक्चर धूल खा रहा है
इसमें शैक्षिक ऋण, किसी व्यवसाय के लिए मार्जिन मनी की व्यवस्था, टर्म लोन सहित सभी योजनाएं अब नहीं चल रही हैं। इस कारण निगम की माली हालत खस्ता हो चुकी है।
यहां पर करीब 90 कर्मचारी हैं। इनमें से कुछ पिछले दिनों रिटायर भी हो गए। कर्मचारियों को वेतन भी तभी मिलता है जब ये लोग लोन की वसूली करते हैं।
कर्मचारियों ने कई बार सरकार से निगम की हालत सुधारने के लिए गुहार लगाई लेकिन कुछ नहीं हुआ।
नोएडा का ट्रेनिंग सेंटर भी हुआ बंद
निगम ने अल्पसंख्यकों को रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने के लिए एक ट्रेनिंग सेंटर नोएडा में खोला था। लेकिन निगम की बदहाली के कारण यह सेंटर भी बंद पड़ा हुआ है। यहां करोड़ों रुपये का इन्फ्रास्ट्रक्चर धूल खा रहा है।
फुलटाइम अधिकारी न होना भी है मुख्य वजह
अल्पसंख्यकों के लिए महत्वपूर्ण इस निगम की इस हालत के लिए पूर्णकालीन अधिकारी का न होना भी एक मुख्य वजह है। निगम में जो एमडी बनाए जाते हैं वे प्रदेश सरकार में भी अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव होते हैं। इस कारण एमडी सचिवालय में बैठकर ही काम-काज चलाते हैं। निगम में वे झांकने तक नहीं आते।
इस पर अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ के विशेष सचिव राकेश कुमार मिश्र का कहना है कि वाकई निगम की हालत काफी खराब है। निगम के निदेशक मंडल ने एक अगस्त को कर्मचारियों को छठा वेतनमान देने के लिए एक प्रस्ताव पास किया था।
इसे सचिव अल्पसंख्यक कल्याण के पास भेज दिया गया है। इस पर फैसला सरकार को करना है। निगम की माली हालत ठीक हो, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।