चुनाव का मौसम है। अब तो हर रंग सियासी है। अब तो हर थाली में उम्मीदों के पुलाव हैं। मगर, इस बहार में बहक मत जाइएगा। पुलाव की खुशबू में खो मत जाइएगा। निदा फाजली के मर्म को समझिए और फिर फैसला कीजिए। उनके अल्फाज आईना हैं। इस आईने में सिर्फ जिंदगी के फलसफे को ही नहीं, अपने भविष्य को भी देखिए। आईना है, झूठ नहीं बोलेगा। एक नहीं, दो नहीं, इसे बार-बार देखिए। अपनी उम्मीदों और बेहतर कल की कसौटी पर सबको परखिए। क्योंकि, सवाल सिर्फ चुनाव का नहीं है। आपका वोट प्रदेश के भविष्य की तस्वीर गढ़ेगा। आपको तस्वीर के हर फ्रेम को दुुरुस्त करना है। इसलिए एक-एक ईंट चुन कर रखिए और उस पर भविष्य की इमारत तैयार करने में सहयोग कीजिए, जैसा कि आप चाहते हैं।
प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशांबी और फतेहपुर के मतदाताओं के दिल की बातें बता रहे हैं अनूप ओझा...
चुनावी समर भूमि सज गई है। कहीं गढ़ बचाने की लड़ाई है, तो कहीं नया गढ़ बनाने की चुनौती। सियासी ताकत और जातीय अस्मिता के सवाल खूब उछाले जा रहे हैं। वादों की बौछार हो रही है, तो मुद्दों की धार पैनी की जा रही है। वोटों के ध्रुवीकरण के लिए जाति और धर्म का रंग गाढ़ा किया जा रहा है। चाय-पान की दुकानों से लेकर चौराहों की अड़ियों तक जीत-हार के दावे किए जा रहे हैं। कहीं नाम और काम हावी है, तो कहीं-कहीं मुफ्त बिजली-पानी के वादों का असर भी दिख रहा है। यूं कहें कि मतदाता सबको देख-परख रहा है। काम के आधार पर मूल्यांकन तो हो रहा है, पर ज्यादातर के मन-मस्तिष्क पर जाति-मजहब के समीकरण ही हावी हैं।
प्रयागराज, कौशांबी, प्रतापगढ़ और फतेहपुर में सर्दी के साथ सियासी पारा भी तेजी से चढ़ रहा है। पिछले चुनावों में चारों जिलों की 28 विधानसभा सीटों में से 22 पर भाजपा व उसके गठबंधन अपना दल एस (भाजपा-18, अपना दल (एस)-4 ) का कब्जा है तो दो सीटें बसपा व एक-एक सीट सपा व कांग्रेस के खाते में हैं। दो पर निर्दलीयों का दबदबा रहा था। इस बार के चुनाव में भी अधिकतर सीटों पर मतदाता जाति-धर्म के मझधार में फंसा हुआ है।
प्रयागराज: तीर्थनगरी में माफिया पर शिकंजे से खुशी, भर्तियों में भ्रष्टाचार से नाराजगी
तीर्थों के राजा प्रयागराज में महंगाई और भर्तियों में भ्रष्टाचार को लेकर नाराजगी बढ़ी है, तो विकास कार्यों के साथ माफिया अतीक अहमद पर शिकंजे को लेकर खुशी भी है। जिले की 12 सीटों में से दो सीटें शहर दक्षिणी उड्डयन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी और शहर पश्चिमी कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के प्रतिनिधित्व की वजह से सुर्खियों में हैं। इससे हटकर मुस्लिम बहुल यह सीट माफिया अतीक और उसके भाई पूर्व विधायक अशरफ समेत उनके करीबियों, रिश्तेदारों और व्यावसायिक साझीदारों के अवैध कब्जे वाले भवनों पर बुलडोजर गरजने से भी खासी चर्चा में है।
शहर पश्चिम में मतदाताओं का मिजाज जानने के लिए हम सुलेमसराय पहुंचे तो चश्मा महल के बगल चाय की दुकान पर चुनावी अड़ी लगी थी। कोई मुस्लिमों के ध्रुवीकरण की बात कर रहा था, तो कुछ लोग ओवैसी के यूपी की सियासत में आने से मुस्लिम वोटों के बंटने की चर्चा कर रहे थे। विनोद जायसवाल ने कहा, चाहे जो भी हो मुस्लिम सपा में ही जाएगा। टक्कर तो सपा और भाजपा के बीच ही रहेगी। बीच में ही अटाला के फैयाज अहमद बोल पड़ते हैं- सिद्धार्थ नाथ ने शहर पश्चिमी को बदल दिया है। इतना विकास कभी नहीं हुआ था। वे सबकी सुनते हैं और मदद भी करते हैं। चकिया में मन्ना मोड़ पर मिले इसराइल कहते हैं कि अबकी विकास का मुद्दा हावी है। किसी का जोर नहीं चलेगा।
अतीक पर सख्ती से मुस्लिमों में नाराजगी के सवाल पर वे कहते हैं, मुसलमानों में सिर्फ 10 फीसदी लोग ही उनकी बात करने वाले होंगे। सिद्धार्थनाथ ने हमेशा गरीबों की मदद की है। विकास भी किया है। ज्यादातर मुसलमान भी उनको चाहते हैं। सुल्तानपुर भावा में बुड्ढा ताजिया के पास मेडिकल स्टोर चलाने वाले अरशद कहते हैं कि मुसलमान अब किसी की झंडाबरदारी में रहने वाले नहीं हैं। सब जानते हैं कि अतीक अपने कर्मों की सजा भोग रहे हैं। उससे आम मुसलमानों का कोई लेना-देना नहीं है। अटाला मस्जिद के पास मिले रहमान और शरबरी आलम कहते हैं कि मुसलमान पढ़े-लिखों के साथ ही जाएगा। जाति-मजहब में बांटने की कोशिशें कामयाब नहीं हो पाएंगी।
शहर दक्षिणी में विरोध के स्वर, लड़ाई भाजपा बनाम सपा की
शहर दक्षिण के कटघर चौराहे पर पान की दुकान चलाने वाले रोहित कुशवाहा चुनाव की बात शुरू होते ही मगही पत्ते पर कत्था-चूना लगाना रोक देते हैं। वह कहते हैं, भइया महंगाई जीने नहीं दे रही है। इस मुद्दे पर तो हर कोई नाराज है, लेकिन विकल्प भी तो नहीं है। मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी से नाराजगी है, फिर भी मोदी के नाम पर वोट उन्हीं को देंगे। इससे फर्क नहीं पड़ता कि प्रत्याशी कौन है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी भी कभी इसी सीट से विधायक चुने गए थे। इसी मोहल्ले में चाय की दुकान पर मिले शनि केसरवानी ने कहा, इस बार बहुत नाराजगी है। महंगाई ने तो आंसू निकाल दिए हैं। वह तंज कसते हुए कहते हैं, यह गुस्सा बुलडोजर से शांत होने वाला नहीं है। इस पर राजीव गुप्ता उनको टोकते हुए कहते हैं, काशी धाम हो या अयोध्या, सब मोदी के काम को सराह रहे हैं। पेट्रोल दो सौ रुपये लीटर भी हो जाए तो क्या, लोग भाजपा को ही जिताएंगे। बलुआ घाट में मिले हरिशंकर निषाद कहते हैं कि यह सच है कि लोग नाराज हैं। मोदी-योगी की सरकारें सिर्फ महंगाई को ही कंट्रोल नहीं कर पाईं, बाकी सब ठीक है। इस बीच छोटा नंदी के नाम से मशहूर धनीराम केशरवानी आ जाते हैं। वे कहते हैं, नंद गोपाल नंदी से नाराजगी भले हो, लेकिन उनको चाहने वाले भी कम नहीं हैं। हालांकि, लड़ाई में सपा रहेगी।
ब्राह्मणों की नाराजगी भी मुद्दा
शहर उत्तरी विधानसभा क्षेत्र में मिले शंभू बैरक के निवासी एडवोकेट शरद चंद्र मिश्र कहते हैं, इस बार आरपार की लड़ाई है। सरकार ने ब्राह्मणों की अनदेखी की। इसका असर जरूर दिखेगा। यहां से चंद कदम दूर हाईकोर्ट चौराहे की आंबेडकर प्रतिमा के पास मिले पीएन श्रीवास्तव दलील देते हैं कि इस बार भाजपा से कोई लड़ाई में नहीं है। दलित समाज भी बहनजी से मुंह मोड़ चुका है। महान दल, समानता दल और स्वाभिमान दल जैसे छोटे दलों का छाछ पीकर सत्ता का स्वाद चखने का सपना देखने वालों को इस बार अंदाजा लग जाएगा। देख लीजिएगा, भाजपा ही जीतेगी, वोटों का अंतर भले ही कुछ कम हो जाए।