मायाराज के 1800 करोड़ रुपये के पिछड़ा अनुदान निधि (बीआरजीएफ) घोटाले में इंजीनियरों, अफसरों और ठेकेदारों ने बुंदेलखंड क्षेत्र के महोबा जिले को मनभर लूटा। बीआरजीएफ के हर काम में लूट के हर तरीके अपनाए गए। महोबा में इस योजना की शुरुआत से अब तक कराए गए कामों में से 110 कामों की जांच कराई। इसमें से 79 कामों में घपले सामने आए।
हर कदम पर ऐसी मनमानी मानो योजना सिर्फ लूट के लिए ही बनाई गई है। जांच में शासन ने दो प्रोजेक्ट अफसरों समेत सात इंजीनियरों के खिलाफ कार्यवाही की सिफारिश की है। ये सारे घोटाले 2008-09 से 2011-12 के दौरान हुए।
महोबा के डीएम की रिपोर्ट में सामने आया कि सड़क बनाने के लिए ज्यादा दूरी दिखाई गई। काम कम करके पैसा हड़पा गया। कई ग्राम पंचायत सचिवालयों के घटिया निर्माण की पुष्टि हुई। आधी-अधूरी सामग्री का इस्तेमाल किया गया।
लाखों रुपये का खर्च दिखाया गया, लेकिन काम कुछ हजार के ही कराए गए। जो काम हुए भी वे कुछ ही दिन में बर्बाद हो गए। रिपोर्ट में कार्यों पर खर्च रकम की वसूली की सिफारिश की गई है।
ये रहे घोटालों के जिम्मेदार
कार्यदायी संस्था के परियोजना प्रबंधक (संतकबीरनगर) आरडी यादव, सहायक परियोजना प्रबंधक एमएम सिंह बांदा, अवर अभियंता पंकज सक्सेना झांसी व महेश कुमार उरई। परियोजना प्रबंधक पीसी सिंघल, सहायक परियोजना प्रबंधक एनके वर्मा व अवर अभियंता आरके मिश्र भी सरकारी रकम की बर्बादी के लिए जिम्मेदार बताए गए हैं।
अपनों को फायदे के लिए घटाई, बढ़ाई सड़क
सड़क, नाली व अन्य कामों की स्वीकृति के लिए सरकार ने जो दूरी तय की, ठेकेदारों, इंजीनियरों ने अपनों को उपकृत करने के लिए इसे मनमाने तरीके से घटाया या बढ़ा दिया। महोबा के विकासखंड पनवाड़ी के ग्राम गाड़ौ में अनुसूचित बस्ती में 335 मीटर लंबे सीसी रोड के लिए 12 लाख मंजूर किए गए थे। लेकिन सड़क 358 मीटर तक बढ़ा दी गई। जांच में निर्माण कार्य घटिया पाया गया।
चुरारी में देशराज पाल के मकान से तालाब के पार्क तक 254 मीटर लंबी सीसी रोड के लिए नौ लाख मंजूर हुए। बनाते समय लंबाई 34 मीटर बढ़ाकर 288 मीटर कर दी गई। ग्राम बुडेरा में 210 मीटर सीसी रोड के लिए 7.50 लाख रुपये मंजूर हुए थे। यहां लंबाई बढ़ाकर 217 मीटर कर दी गई। अटघार हरिजन बस्ती में 277 मीटर लंबी सीसी रोड के लिए नौ लाख मंजूर हुए। बाद में लंबाई बढ़ाकर 295.05 मीटर कर दी गई। इसके लिए निर्माण की गुणवत्ता ताक पर रख दिया गया।
रिहुनिया गांव में 129 मीटर लंबी सीसी रोड के लिए 4.50 लाख रुपये मंजूर हुए। निर्माण के समय लंबाई 24.75 मीटर बढ़ा दी गई। कम लागत में ज्यादा निर्माण पर किसी तरह की कमी नहीं मानी गई। 4.49 लाख खर्च कर दिए गए। ग्राम बैहारी में 136 मीटर सीसी रोड छह लाख में बनना था।
लंबाई बढ़ाकर 159.60 मीटर कर दी गई और 5.98 लाख खर्च किए गए। उसी बजट में मनमानी पूर्वक करीब 23.60 ज्यादा काम कराने को गलत नहीं माना गया। ग्राम धवारी में जयकरन के मकान से 322 मीटर सीसी रोड के लिए 11.25 लाख दिए गए। सड़क बढ़ाकर 355 मीटर कर दी गई। सड़क कहीं धस गई है तो कई टूट गई। दूरी बढ़ाने से गुणवत्ता घटनी थी और काम घटिया होना ही था।
सचिवालयों के निर्माण में करोड़ों का चपत
ग्राम पंचायत सचिवालयों के निर्माण में भी सरकारी खजाने को खूब चूना लगाया गया। पहले तो 14.70-15.52 लाख रुपये में आधे-अधूरे व घटिया काम किया गया। अब इसे ठीक कराने के लिए करोड़ों की जरूरत बताई गई है।
ग्राम पंचायत सचिवालय अस्थौन के घटिया निर्माण ठीक कराने में 2.26 लाख रुपये, पहरेथा में 1.60 लाख रुपये, बम्हौरी बेलरारान में 60,369 रुपये, बिलबई में 4.20 लाख रुपये, कालीपहाड़ी में 2 लाख रुपये, परसहा में 4.35 लाख, बरमौली में 1.39 लाख रुपये, ज्योरइया में 2.60 लाख रुपये, मौहारी में 1.39 लाख, मगरौल कला में 4.75 लाख रुपये, पनारा (विजयपुर) में नौ लाख रुपये, पहाड़िया में 88 हजार, रूरीकलां में 85 हजार, बैंदो में 40 हजार, लौलारा में 7.50 लाख, फदना में 1,86,731 रुपये, अकठौहा में 66 हजार, नथूपुरा में 71 हजार, ग्योड़ी में 76 हजार, कहरा में 76 हजार, पसवारा में 15 हजार, तिन्दुही में 76 हजार, बरातपहाड़ी में 66 हजार, सिजवाहा में 76 हजार, कराहरा खुर्द में 66 हजार, बपरेथा में 76 हजार, अनघौरा में 76 हजार, रगौलिया बुजुर्ग में 66 हजार, महुआबांध में 76 हजार, अकौना में 20 हजार, बुधवारा में 70 हजार, ननवारा में 66 हजार, कनकुआं में 71 हजार, खैरोकलां में 80 हजार, कोहनिया में 10 हजार, देवगनपुरा में 70 हजार, कोनिया में 80 हजार, मिरतला में 18 हजार रुपये ठीक कराने में लगेंगे।
घटिया सड़क बनाई, अब होगी वसूली
अमानपुरा ग्राम पंचायत के ग्राम भरवारा में मेन रोड से प्राइमारी पाठशाला तक सीसी रोड बननी थी। 12 लाख में इतना घटिया काम किया गया कि जांच में पूरी लागत वसूल करने की सिफारिश की गई है।
ग्राम कोहनियां में मड़वारी तक सपंर्क मार्ग की सोलिंग में 20166 रुपये, काशीपुरा अनुसूचित जाति बस्ती में सीसी रोड निर्माण में 35 हजार, नैपुरा में धरवार संपर्क मार्ग तक सोलिंग कार्य में 34900 रुपये, मसूदपुरा में सीसी रोड निर्माण में 10243 रुपये, लुहरगांव में संपर्क मार्ग की सोलिंग कार्य से 32314 रुपये, धवार गांव में सीसी रोड में 79170 रुपये, बहादुरपुर कला में 17857 टिकरिया में सीसी रोड के काम में करीब 52 हजार, बम्हौरी कुर्मिन गांव में सीसी रोड के काम में 52 हजार, सौरा में सीसी रोड के काम में 99 हजार की वसूली की सिफारिश की गई है।
पिपरी में मेनरोड से हटवारा तक सीसी रोड के काम में विभिन्न स्तर पर वसूली की सिफारिश की गई। पनवाड़ी में दुर्गा मंदिर से हुए सीसी रोड निर्माण में 10 लाख रुपये की लागत का 25 प्रतिशत वसूली की संस्तुति की गई। अंडवारा में 12.50 प्रतिशत, रिछा में 20.83 प्रतिशत, ग्राम बीला में रेलवे फाटक से हुए सीसी रोड के काम और रतौली में नैगवां सपंर्क मार्ग पर पुलिया निर्माण में सीमेंट की लागत का 80-80 प्रतिशत, मिरतला में सीसी रोड के निर्माण में आठ प्रतिशत तथा करहरा कला में सीसी रोड निर्माण में 10 प्रतिशत की वसूली की सिफारिश की गई है।
काम कम पर भुगतान पूरा
सराफीपुरा र्वाड में मोहल्ला रामनगर में गोपीनाथ बसोर के मकान से भोलानाथ के मकान तक 252 मीटरसीसी रोड व नाली बननी थी। इसके लिए 4.40 लाख मंजूर किए गए थे। आधे से भी कम (108 मीटर) काम करवाकर तीन चौथाई रकम (3.05 लाख रुपये) खर्च बता दी गई। जांच में पता चला कि सीसी रोड की बीच-बीच में गिट्टी उखड़ गई है और नाली टूट गई।
एक नमूना ये भी
मलकपुरा वार्ड में कुल 137 मीटर लंबाई काम के लिए 3.96 लाख रुपये दिए गए। काम के समय 40 मीटर लंबाई बढ़कार 177 मीटर कर दी गई। खर्च भी कुल जमा 2.83 लाख रुपये हुआ और जांच अधिकारी ने कार्य भी संतोषजनक करार दिया।
इस जांच रिपोर्ट ने निर्माण कार्यों केलिए लागत के आकलन और मानक के निर्धारण पर सवाल खड़ा कर दिया। सवाल ये है कि यदि कम लंबाई की लागत में उससे भी कम पैसा खर्च कर ज्यादा काम संतोषजनक कैसे हो सकता है? और अगर यह सही है तो फिर पूरी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ जाती है।
जांच में मनमानी, अफसर को नहीं दिखी हीला हवाली
राजकीय बहुउद्देशीय औद्योगिक इकाई छतरपुर में सीसी रोड व पक्की नाली बननी थी। 154 मीटर लंबाई में पांच लाख रुपये से काम होने थे। कार्यदायी संस्था जिला पंचायत थी।
नमूना जांच रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ 142 मीटर लंबाई में काम कराकर 4.96 लाख रुपये खर्च कर दिए गए। इस तरह लंबाई में 12 मीटर कम रोड बनी। सीसी रोड के निर्माण में औसत में 3246.75 रुपये प्रति मीटर का खर्च पड़ रहा था।
इस तरह 12 मीटर कम निर्माण होने से 38961 रुपये बचना चाहिए। कुल जमा चार हजार रुपये बचत दिखाए जाने को जांच अधिकारी ने नोटिस नहीं लिया। निर्माण कार्य को क्वालिटी का बताकर सरकार को करीब 34 हजार रुपये का चूना लगाया गया। जांच अधिकारी ने इसके लिए किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की।
ग्राम अटघार कम्हरिया रोड़ से दाता की कुटटी तक शून्य से सोलिंग टापकोट का काम होना था। 1125 मीटर लंबे काम के लिए 18 लाख रुपये मंजूर हुए थे। यहां 17.95 लाख खर्च कर 1082 मीटर ही काम कराया गया।
जांच अधिकारी ने 42 मीटर कम काम से करीब 60 हजार रुपये से ज्यादा के गोलमाल का नोटिस ही नहीं लिया। यही नहीं, गुणवत्ता संतोषजनक होने का सर्टिफिकेट भी दे गए।
कमलखेड़ा में हरचरन कुशवाहा के मकान से कामता के मकान तक 267 मीटर सीसी रोड नौ लाख में बननी थी। 8.97 लाख खर्च कर 256 मीटर ही काम कराया गया। 11 मीटर कम काम होने के बावजूद घटिया काम की पुष्टि हुई है। जांच अधिकारी ने किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की।