रैली को संबोधित करती सावित्री बाई फुले।
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जानकारी के मुताबिक, फुले पहले भी भाजपा से बगावत करके बसपा में जा चुकी हैं, पर बाद में लौट आई थीं। विधानसभा की सदस्यता से त्याग पत्र देने से उनकी सीट पर हुए चुनाव के वक्त भी उनकी बहराइच के स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं से खींचतान की खबरें सार्वजनिक हुई थीं।
कहा गया था कि वह अपने एक रिश्तेदार को चुनाव लड़ाना चाहती थीं, लेकिन पार्टी ने टिकट नहीं दिया। पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव के दौरान भी टिकट को लेकर सांसद की स्थानीय कार्यकर्ताओं से खींचतान चर्चा में रही थी। समानांतर संगठन चलाने से भी भाजपा के स्थानीय नेता नाराजगी जाहिर करते रहे हैं।
नहीं की भाजपा नेताओं से बात
भाजपा के प्रमुख नेता लगातार फुले से बातचीत करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। जानकारी के मुताबिक भाजपा के एक संगठन मंत्री को शनिवार को उनसे मिलने के लिए बहराइच भेजा गया। पर, वह उनसे भी नहीं मिलीं। सांसद के कुछ करीबी लोगों से भी भाजपा नेतृत्व ने बात की। सांसद के करीबी लोगों ने बताया कि वह ओमप्रकाश राजभर की तरह केंद्रीय नेतृत्व से सीधे बात करना चाहती हैं।
संविधान व आरक्षण बचाओ महारैली में वक्ताओं ने भाजपा पर खूब तीर चलाए। कहा कि भाजपा राज में दलितों के अधिकारों पर कुठाराघात किया जा रहा है। सांसद सावित्री बाई फुले से यह पूछे जाने पर कि क्या वे अब खुद को भाजपा से अलग मानती हैं, उनका जवाब था कि वे भारत की सांसद हैं।
महारैली का पूरा मंच नीला था, जिस पर बीआर आंबेडकर और कांशीराम के चित्रों को प्रमुखता से स्थान दिया गया था। कहीं भी साध्वी फुले के नाम के साथ भाजपा सांसद नहीं लिखा था। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अवधेश वर्मा ने कहा कि भाजपा के बुद्धिजीवी गवर्नर राम नाईक के सुझाव पर बीआर आंबेडकर के नाम में भी ‘राम’ जुड़वा रहे हैं। पर, गवर्नर ने संसद में आरक्षण बिल पास करवाने के लिए भी पत्र लिखा था, उस पर विचार नहीं हो रहा। यूपी में दलितों का उत्पीड़न चरम पर है। बहुजन समाज भाजपा को सत्ता से बाहर करने का भी माद्दा रखता है।
महारैली के आयोजक अक्षयवर नाथ कन्नौजिया ने कहा कि भाजपा के लोग संविधान को बकरी की तरह चबाना चाहते हैं। जातिगत आधार पर देश में जनगणना होनी चाहिए। लंदन से आए अंबेडकर विचार मंच के अध्यक्ष मिल्कियत सिंह बहल ने कहा कि मंदिरों में दीये जलाने से कुछ नहीं होगा, अपनी बेहतरी के लिए हमें कदम से कदम मिलाकर चलना होगा।
राष्ट्रीय मूल निवासी संघ के अध्यक्ष बाबू बच्चन ने कहा कि आरएसएस ने पहले ही कह दिया था कि उसे मौजूदा संविधान मंजूर नहीं है। वे मनुस्मृति के आधार पर तैयार संविधान लागू करेंगे। ऑल इंडिया एससी-एसटी रेलवे इम्प्लाइज एसोसिएशन के राष्ट्रीय महामंत्री अशोक कुमार ने कहा कि भाजपा सरकार कोर्ट के आदेश लाकर आरक्षण को खत्म करने की साजिश कर रही है।
संविधान की हो रही हत्या : सुबचन राम
प्रधान आयुक्त, आयकर सुबचन राम ने कहा कि हमारे देश में संविधान की हत्या की जा रही है। देश में लागू 75 व्यवस्थाएं ऐसी हैं, जो संविधान के खिलाफ हैं। संविधान के अनुसार, जय भारत बोलना चाहिए, जय हिंद नहीं।