पूर्व मंत्री गौतम कभी बसपा के कैडर प्रशिक्षक रहे हैं। कांशीराम से लेकर मायावती के जमाने में भी उनकी संगठनात्मक हनक रही है। अब वह सपा के साथ हैं। उनके आने से पार्टी को दोहरा फायदा हो रहा है। एक तो वह जाटव बिरादरी से हैं। दूसरी तरफ वह बसपा के काडर रहे हैं। ऐसे में वह दलितों की नब्ज को भी अच्छे से समझते हैं। वह बिना मायावती पर निशाना साधे बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के सपने को साकार करने का संकल्प दिला रहे हैं।
वह यह भी समझाते हैं कि बदली परिस्थितियों में समाजवादी पार्टी को सत्ता में लाना क्यों जरूरी है? वह सीतापुर जिले के मिश्रिख, फर्रुखाबाद के कायमगंज, कन्नौज, हरदोई के सांडी, रायबरेली के बछरावां, प्रयागराज के कोराव, सोरांव, फतेहपुर के खागा आदि सुरक्षित सीटों पर सम्मेलन कर चुके हैं। हर क्षेत्र में सम्मेलन के बाद वह अपनी टीम के साथ जाटव बिरादरी के कार्यकर्ताओं के घर जाकर चौपाल लगा रहे हैं।
इस चौपाल में भी सपा के लिए जाटव बिरादरी का साथ मांगा जा रहा है। फिलहाल यह कसरत कितनी कारगर होगी, यह तो समय बताएगा, लेकिन सपा के रणनीतिकार इस बार किसी तरह की चूक नहीं छोड़ रहे हैं।