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यूपी: सपा अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ व बाबा साहब वाहिनी का नहीं हो पाया गठन, असमंजस में दलित नेता

Wed, 22 Sep 2021 02:17 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

समाजवादी पार्टी के नेतृत्व ने माजवादी लोहिया वाहिनी को गांव- गांव दलित संवाद कार्यक्रम चलाने का निर्देश दिया है लेकिन अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ का अध्यक्ष तय न होने से ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है।
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समाजवादी पार्टी फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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समाजवादी पार्टी एक तरफ कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर मतदाताओं को जोड़ने के अभियान में लगी है तो दूसरी तरफ अभी तक अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ का अध्यक्ष तय नहीं कर पाई। इतना ही नहीं बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की जयंती पर बाबा साहब वाहिनी गठित करने का संकल्प भी पूरा नहीं हो पाया है।

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ऐसे में लोहिया वाहिनी को गांव-गांव दलित संवाद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी से जुड़े दलित नेता इस कदम को सियासी नजरिए से ठीक नहीं मान रहे हैं। उनका तर्क है कि दलितों से जु़ड़े कार्यक्रम अनुसूचित प्रकोष्ठ के जरिए चलाने से पार्टी को एनर्जी मिलेगी।
 
समाजवादी पार्टी में विभिन्न वर्ग के लोगों को जोड़ने के लिए फ्रंटल संगठन और प्रकोष्ठ हैं। पार्टी की ओर से फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारियों की घोषणा की जा रही है, लेकिन अल्पसंख्यक मोर्चा की तरह ही अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष भी तय नहीं कर पाई है। ऐसे में दलित नेता उहापोह की स्थिति में है।
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अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के नेताओं का कहना है कि प्रकोष्ठ का गठन नहीं होने से वे समाज में बेहतर संदेश नहीं दे पा रहे हैं। इसी तरह बाबा साहब भीमराव आंबेडकर जयंती पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर बाबा साहब वाहिनी गठन का संकल्प दोहराया था। लेकिन पार्टी हाईकमान पांच माह बाद भी इस पर फैसला नहीं ले सका है।

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लोहिया वाहिनी गांव-गांव चला रही है कार्यक्रम

अब पार्टी हाईकमान की ओर से समाजवादी लोहिया वाहिनी को गांव- गांव दलित संवाद कार्यक्रम चलाने का निर्देश दिया है। यह कार्यक्रम शुरू भी हो चुका है, लेकिन लोहिया वाहिनी के जरिए दलित संवाद कार्यक्रम को लेकर दलित नेता असहज महसूस कर रहे हैं। उनका तर्क है कि लोहिया वाहिनी के जरिए अभी तक दलित संवाद जैसा कार्यक्रम कभी नहीं हुआ है।

इस तरह का कार्यक्रम अनुसूचित प्रकोष्ठ ही करता रहा है। फिलहाल इस मुद्दे पर पार्टी के जिम्मेदार खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं। इतना जरूर कहते हैं कि जल्द ही प्रकोष्ठ का गठन कर दिया जाएगा।
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