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साहित्यकारों को सम्मानित करने गए राज्यपाल, खुद सम्मानित होकर लौटे, बोले- मैं एक्सीडेंटल लेखक

Sun, 11 Nov 2018 11:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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सम्मानित होते राज्यपाल रामनाईक - फोटो : amar ujala
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साहित्यगंधा साहित्यिक पत्रिका की ओर से रविवार को साहित्य की विभिन्न विधाओं के  साहित्यकारों को साहित्यगंधा सम्मान-2018 प्रदान किया गया। गोमतीनगर में आयोजित समारोह में राज्यपाल राम नाईक ने इन साहित्यकारों के साथ ही साहित्यगंधा लघुकथा प्रतियोगिता के विजेता सौरभ टंडन शशि को भी सम्मानित किया।

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इस अवसर पर नाईक ने कहा, सम्मान की शृंखला में आत्मकथा गंधा सम्मान जोड़ देते तो क्या पता वह सम्मान मुझे मिल जाता? इस पर आयोजकों ने तत्काल अमल किया और पहले आत्मकथा गंधा सम्मान की घोषणा करते हुए राज्यपाल की आत्मकथा ‘चरैवेति!चरैवेति!!’ को सम्मानित करने का निर्णय ले लिया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. उदय प्रताप सिंह ने अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न देकर राज्यपाल का सम्मान किया।

द्वितीय साहित्यगंधा सम्मान समारोह का आयोजन महाकवि गुलाब खंडेलवाल की स्मृति में आयोजित समारोह में अमेरिका से आए उनके पुत्र शरद खंडेलवाल ने राज्यपाल को अपने पिता की एक कृति भी भेंट की। इस दौरान साहित्यगंधा के मुख्य संपादक सर्वेश अस्थाना, कवि कुंवर बेचैन, मुकुल महान, अभय सिंह निर्भीक, डॉ. विष्णु सक्सेना, पंकज प्रसून, मिस यूपी तान्या वर्मा आदि मौजूद रहे।
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‘चरैवेति! चरैवेति!!’ का चार और भाषाओं में हो रहा अनुवाद
राज्यपाल ने बताया कि वह वास्तव में ‘एक्सीडेंटल लेखक हैं। उन्होंने कहा, महाराष्ट्र की एक पत्रिका के संपादक ने महाराष्ट्र से जुड़े और देश की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले चार नेताओं में मुझे चुना। मेरे अलावा शरद पवार, मनोहर जोशी, सुशील कुमार शिंदे थे। उस पत्रिका के लिए मैंने 27 लेख लिखे। बाद में इनका संकलन करके ‘चरैवेति!चरैवेति!!’ लिखी गई। हिंदी, मराठी सहित छह भाषाओं में प्रकाशन के बाद चार और भाषाओं में इसका अनुवाद हो रहा है। दिसंबर तक जर्मन, फारसी, अरबी और सिंधी में अनुवाद होकर प्रकाशन हो जाएगा। राज्यपाल ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। इसकी उन्नति ही हमारी राष्ट्रीय पहचान है।

इनको मिला साहित्यगंधा सम्मान

अनवरतगंधा सम्मान : कृष्ण मित्र (वर्तमान पाकिस्तान के कोटनक्का गुजरांवाला में जन्मे और विभाजन के बाद गाजियाबाद में आकर बसे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ दैनिक वीर अर्जुन में काम किया।)

गीतगंधा सम्मान : डॉ. सुरेश (अमेठी में जन्मे डॉ. सुरेश को ‘हम तो ठहरे यार बंजारे’ जैसे गानों से पहचान मिली।)

गजलगंधा सम्मान : डॉ. कलीम कैसर (गंगा-जमुनी तहजीब के लिए पूरी दुनिया में पहचान बना चुके डॉ. कैसर ने ‘इश्क था जैसे’ गजल संग्रह की रचना की।)

लोकगंधा सम्मान : सदाशिव त्रिवेदी (एकघरा जैतीपुर उन्नाव निवासी सदाशिव त्रिवेदी नाबार्ड में सहायक महाप्रबंधक और आरबीआई में स्टाफ अफसर रहे। अवधी साहित्य पर उनका काफी काम है।)

ओजगंधा सम्मान : मदनमोहन समर (मध्यप्रदेश के सुल्तानपुर, रायसेन निवासी मदनमोहन विभाजन के बाद भारत आए। ‘समय समेटे साक्ष्य’ उनकी ओज कविताओं का संग्रह है।)

कथागंधा सम्मान : संजीव जायसवाल (भारतीय रेल में अधिकारी संजीव की क हानियों का अनुवाद विश्व की 14 भाषाओं में हो चुका है। कहानी संग्रह ‘खोया हुआ बचपन’, ‘गुरु दक्षिणा’ लोकप्रिय हैं।)
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ये भी किए गए सम्मानित

व्यंग्यगंधा सम्मान : इंद्रजीत कौर (बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक इंद्रजीत व्यंग्य के साथ बाल साहित्य पर भी लिखती हैं। ‘ईमानदारी का सीजन’ के बाद उनका दूसरा व्यंग्य संग्रह ‘पंचरतंत्र की कथाएं’ जल्द ही आने वाला है।)

बाल साहित्यगंधा सम्मान : सत्य नरायन सत्य (हिंदी बाल साहित्य में पीएचडी सत्य अब तक दिन आए फिर छुट्टी वाले, अनोखा फैसला, धन धन म्हारो राजस्थान जैसी कृतियां लिख चुके हैं।)
पत्र साहित्यगंधा सम्मान : संतोष वाल्मीकि (स्वच्छकार परिवार से जुड़े संतोष का शुरुआती जीवन काफी संघर्षमय रहा। उन्होंने पत्रकारिता करते हुए साहित्यिक रचनाएं कीं, गोपालदास नीरज, कैफी आजमी पर टेली फिल्में भी बनाई हैं।)

युवगंधा सम्मान : डॉ. रुचि चतुर्वेदी (आगरा कॉलेज में गणित की प्रवक्ता डॉ. रुचि विशुद्ध साहित्यिक मुक्तकों और गीतों के साथ कवि सम्मेलनों में प्रस्तुतियां देती हैं।)

चित्रगंधा सम्मान : हरिमोहन बाजपेयी माधव (रायबरेली में जन्मे हरिमोहन मूल रूप से कार्टूनिस्ट हैं। हिंदी के साथ संस्कृत, उर्दू व अंग्रेजी में लेखन करते हैं।)
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