लखनऊ के इंदिरानगर के शेखर अस्पताल में बुजुर्ग मरीज की मौत पर हंगामा हुआ। ऑपरेशन के एक दिन बाद मरीज की हालत बिगड़ने पर कोई डॉक्टर देखने तक नहीं पहुंचा। मौके पर पहुंची पुलिस ने मामला शांत कराया।
मड़ियांव के बृजेश यादव ने पिता शंकरलाल (70) को बाएं पैर में फ्रैक्चर की शिकायत के बाद शेखर अस्पताल में शुक्रवार सुबह भर्ती कराया। बृजेश ने बताया कि सर्जरी के लिए दस हजार रुपये जमा कराए गए।
दोपहर में ऑर्थो सर्जन ने सर्जरी की और वार्ड में भर्ती कर दिया। शनिवार को अचानक मरीज की हालत बिगड़ गई और वो बेहोश हो गए। करीब आधे घंटे तक कोई इलाज न मिलने से मरीज की सांस फूलती रही और शनिवार दोपहर मौत हो गई।
डॉक्टर के न मिलने से नाराज परिवारीजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। बृजेश का आरोप था कि अस्पताल में हार्ट का कोई डॉक्टर देखने तक नहीं आया। समय रहते मरीज को ऑक्सीजन लगा दी गई होती तो जान बच सकती थी। परिवारीजनों ने डॉक्टरों से इलाज की फाइल मांगी तो वो देने से मना कर दिया।
पुलिस पहुंची तब जाकर तीन घंटे बाद डॉक्टरों ने फाइल दी। इस मामले में अस्पताल के पीआरओ अरुण दुबे का कहना है कि मरीज के इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई। शनिवार को उसे हार्ट अटैक पड़ा जिससे उसकी मौत हो गई। मरीज का हार्ट अचानक पूरी तरह बैठ गया।