राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने संघ परिवार के विभिन्न संगठनों में तालमेल के लिए समन्वय समितियां बनाने का फैसला किया है। ये समितियां राष्ट्रीय स्तर से लेकर जिलों तक बनेंगी। इनमें भाजपा, विहिप सहित अन्य सभी संगठनों के प्रतिनिधि रहेंगे। समितियों की हर महीने बैठकें होंगी, जिनमें उस महीने के कामकाज की समीक्षा के साथ ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
पौधरोपण, पर्यावरण व जल संरक्षण जैसे काम भी हाथ में लिए जाएंगे जिनके जरिये आम लोगों को जोड़ा जा सके। लखनऊ से कुछ दूर स्थित उन्नाव के कृषि विज्ञान केंद्र में संघ के शीर्ष नेतृत्व ने बुधवार को यह कार्ययोजना तैयार की।
साथ ही केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक के दौरान सामने आए अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई। सभी ने महसूस किया कि अब, जब भाजपा केंद्र के साथ-साथ कई राज्यों में सरकार की भूमिका में है तो समन्वय पर अधिक ध्यान देना जरूरी है।
जमीनी कार्यकर्ताओं की समस्याएं, लोगों की अपेक्षाएं और कुछ जगहों पर हिंदुओं के मान-सम्मान व स्वाभिमान पर आने वाले संकटों की जानकारी तथा उनसे मुक्ति के इंतजाम की भी चिंता करना आवश्यक हो गया है।
इतिहास की पुनरावृत्ति रोकने को सजग
दरअसल, अतीत में सामने आई समस्याओं से संघ इस बार काफी सजग है। उसे पता है कि समन्वय की कमी और आम लोगों की अपेक्षाएं पूरी न होने व समस्याओं का समय से समाधान न होने के कारण ही केंद्र में अटल सरकार और उत्तर प्रदेश में बनी भाजपा सरकारों को सबसे ज्यादा आलोचना का सामना करना पड़ा।
विकास कार्य करने के बावजूद सरकार अपने ही लोगों के निशाने पर रही। संघ परिवार के कार्यकर्ता नाराज होकर घर बैठ गए। इसलिए संघ नहीं चाहता कि इस बार फिर वैसी नौबत आए।
रचनात्मक कार्यों के जरिये भी जोड़ने पर जोर
जानकारी के मुताबिक, संघ का शीर्ष नेतृत्व इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि रचनात्मक सामाजिक कार्यों में कहीं न कहीं निष्क्रियता अवश्य आई है। अगर इस पर ध्यान दिया जाए तो लोग संघ के कामकाज में सक्रिय हिस्सेदारी निभा सकते हैं।
साथ ही लोगों को यह संदेश दिया जा सकता है कि संघ परिवार गांवों के विकास, पौधरोपण, पर्यावरण सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण व सफाई को लेकर भी चिंतित है। इसीलिए तय किया गया है कि इन सभी कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से चलाने के लिए जिले से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक किसी न किसी प्रचारक को प्रभारी बनाया जाए।
सरसंघचालक सहित अन्य पदाधिकारी लौटे
बुधवार को हुई बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत सहित संघ के करीब 20 केंद्रीय पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में पदाधिकारियों का आगे कार्यक्रम भी तय किया गया और देश के सामने मौजूद मुद्दों के मद्देनजर रणनीति को अंतिम रूप दिया गया।
बैठक के बाद सभी पदाधिकारी अपने-अपने केंद्रों को लौट गए।