लोकसभा चुनाव की आहट देख राष्ट्रीय लोकदल ने हाईकोर्ट बेंच और हरित प्रदेश के मुद्दे को हवा देने की योजना बनाई है।
इसी के साथ किसानों, मुसलमानों और अति पिछड़ों से जुड़े मामलों को गरमाने की तैयारी है।
मंगलवार को राष्ट्रीय लोकदल की पश्चिमी उत्तर प्रदेश इकाई की बैठक में इन सभा मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई।
वेस्ट यूपी से रालोद के पांच सांसद है। दो सांसद बगावत कर चुके हैं। आगामी लोकसभा चुनाव में रालोद के सामने न केवल अपना जनाधार बचाए रखने बल्कि बागी सांसदों को सबक सिखाने की भी चुनौती है।
रालोद ने पश्चिमी यूपी की जनभावनाओं और अपने बेस वोट से जुड़े मुद्दों पर अभियान चलाने का फैसला लिया है।
सांसद जयंत चौधरी की मौजूदगी में पश्चिमी यूपी की बैठक में हाईकोर्ट बेंच की दशकों पुरानी मांग, हरित प्रदेश निर्माण और केंद्रीय सेवाओं में जाटों के आरक्षण के मुद्दे पर संघर्ष का फैसला लिया गया।
हाईकोर्ट बेंच पर रालोद वकीलों के आंदोलन का समर्थन करेगा। यह भी तय हुआ कि सच्चर कमेटी की सिफारिशों और अति पिछड़ों को वाजिब हक दिलाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। धनगर समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल कराने पर खास जोर दिया गया।
रालोद के पश्चिमी यूपी के अध्यक्ष सतबीर त्यागी ने बताया कि गन्ना और आलू किसानों की समस्याओं को लेकर जिला स्तर पर बड़े आंदोलन के लिए शीघ्र तारीख तय की जाएगी।
हर जिले में प्रभारी और सहप्रभारी तैनात किए जाएंगे। जिलों की मासिक बैठकों में वे खुद मौजूद रहेंगे। संगठन का विस्तार न्याय पंचायत स्तर तक किया जाएगा।
सदस्यता अभियान जोरशोर से चलाया जाएगा। एक पदाधिकारी प्रतिदिन जिला मुख्यालय पर बैठकर जनसमस्याएं सुनेगा और उनका निस्तारण कराएगा।
बैठक में प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था ध्वस्त होने और विकास ठप रहने पर भी चिंता जताई गई। बैठक में कई विधायक और पदाधिकारी मौजूद थे।