1989-98 के बीच प्रदेश में कई सीनियर बेसिक स्तर के संस्थान स्थापित हुए। इनमें शिक्षकों व अन्य स्टाफ की तैनाती की गई। सरकार ने 28 अप्रैल, 2005 से मासिक पेंशन योजना बंद कर इसकी जगह नए भर्ती कर्मियों के लिए 1 अप्रैल, 2005 से नई सहभागिता पेंशन योजना लागू कर दी। साथ ही संस्थानों के शिक्षकों व कर्मियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उनके संस्थान नई पेंशन योजना लागू होने के बाद लाए गए।
2 दिसंबर, 2006 से राज्य सरकार ने 1989-98 के बीच खुले 100 संस्थानों को अनुदान सूची में भी ले लिया। इसी से संबंधित शासनादेश के खिलाफ याचिकाएं दायर हुईं थीं, जिन्हें कोर्ट ने मंजूर कर प्रश्नगत शासनादेश को रद्द कर दिया।