इसी तरह यूपी के आईजी स्तर के अफसर मेरठ रेंज के आईजी प्रवीण कुमार और गृह विभाग में सचिव के पद पर तैनात भगवान स्वरूप को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए सूचीबद्घ किया गया है, लेकिन प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए अनुमति मिलना बाकी है।
मुरादाबाद के एसएसपी प्रभाकर चौधरी को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की ओर से बुलावा भी आ रहा है, लेकिन प्रदेश सरकार प्रभाकर को छोड़ने के लिए राजी नहीं। प्रभाकर की गिनती ईमानदार अफसरों में होती है। वहीं सूत्रों का कहना है कि पहले भी प्रदेश के कई अफसरों ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई। इसमें एडीजी रैंक के चार अफसर शामिल हैं।
लौट कर आए अफसरों को दीं गईं अहम जिम्मेदारी
बीते दो साल में जो आईपीएस अफसर वापस आए हैं उन्हें सरकार ने अहम जिम्मेदारियां दीं। डीजी रैंक के अफसर डीएस चौहान को इंटेलीजेंस जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात किया गया। राजीव सभरवाल को मेरठ, अखिल कुमार को गोरखपुर और भानु भास्कर को कानपुर जोन का एडीजी बनाया गया है।
अशोक कुमार सिंह को ट्रैफिक, रवि जोसेफ को डीजीपी का जनरल स्टाफ आफिसर, ज्योति नारायण को कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी, जीके गोस्वामी को एटीएस का मुखिया और तरुण गाबा को गृह विभाग में सचिव के पद पर भेजा गया। दो साल में केंद्र से लौटे अन्य अफसरों में 1990 बैच के आईपीएस संदीप सालुंके को तकनीकी सेवाएं और 1997 बैच के नवीन अरोड़ा को लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में संयुक्त पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी दी गई।