प्रदेश में नई श्रम व्यवस्था के तहत 29 पुराने और जटिल श्रम कानूनों को समाप्त कर चार संहिताओं में समाहित किया गया है। वेतन संहिता के तहत पहली बार सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन अनिवार्य किया गया है। केंद्र सरकार फ्लोर वेज तय करेगी, जिससे नीचे राज्य वेतन निर्धारित नहीं कर सकेंगे।
वेतन का भुगतान हर महीने सात तारीख तक अनिवार्य होगा। ओवरटाइम पर दोगुना भुगतान करना होगा। समान कार्य के लिए समान वेतन (लिंग, जाति, धर्म के आधार पर भेदभाव समाप्त) होगा। छंटनी और हड़ताल के नए नियम होंगे।
इसके तहत 300 या अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों को ही छंटनी या बंदी के लिए सरकारी अनुमति लेनी होगी। पहले यह सीमा 100 थी।
दुर्घटना भी कार्य से जुड़ी मानी जाएगी
नई सामाजिक सुरक्षा संहिता में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों (जैसे डिलीवरी व एप आधारित कामगार) को शामिल किया गया है। कंपनियों को 1-2% वार्षिक कारोबार सामाजिक सुरक्षा फंड में देना होगा। कार्यस्थल आने-जाने के दौरान दुर्घटना भी कार्य से जुड़ी मानी जाएगी। नई व्यवस्था में निरीक्षक की भूमिका इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर की होगी। छोटे उल्लंघनों पर पहले सुधार का मौका दिया जाएगा, जबकि गंभीर मामलों में जुर्माना 20 लाख रुपये तक हो सकता है। नई संहिताओं से सबसे बड़ी राहत एमएसएमई सेक्टर को मिलेगी।
- 300 से कम श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों में नोटिस और मुआवजा जरूरी। हड़ताल से पहले 14 दिन का नोटिस जरूरी।
- 20 से अधिक श्रमिकों वाले संस्थानों में शिकायत निवारण समिति जरूरी
- छंटनी की स्थिति में 'री-स्किलिंग फंड' में 15 दिन का वेतन जमा करना होगा
- 8 घंटे कार्य दिवस, 48 घंटे साप्ताहिक सीमा
- 50 से अधिक ठेका श्रमिकों पर नियम लागू
- सभी श्रमिकों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य
- 40 वर्ष से अधिक श्रमिकों का वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण
- महिलाओं को सभी शिफ्टों में काम की अनुमति
- सामाजिक सुरक्षा: गिग व प्लेटफॉर्म श्रमिक भी शामिल।