संविदा शिक्षकों की इसी भर्ती में मनमानी की गई। यही नहीं संविदा शिक्षकों का नवीनीकरण भी निदेशक ने कर दिया। इस मामले की शिकायत जब शासन स्तर पर की गई तो निदेशक होम्योपैथी को हटा दिया गया और उनके खिलाफ जांच भी बैठा दी गई। अलीगढ़ व गोरखपुर के मेडिकल कॉलेजों में एक भी संविदा शिक्षक नहीं है।
दोनों ही कॉलेजों में 2019 सत्र के लिए बीएचएमएस फर्स्ट प्रोफेशनल की कक्षाएं शुरू हुई थी। लेकिन वहां संविदा शिक्षक कई अन्य विषय के रख लिए गए थे। ऐसे में बिना जरूरत शिक्षक रखने से शासन को लाखों रुपये का नुकसान भी उठाना पड़ा। इसकी शिकायत भी शासन स्तर पर की गई है। पूर्व निदेशक सहित निदेशालय के कई अधिकारियों पर वित्तीय अनियमितता की जांच भी चल रही है।
होम्योपैथिक निदेशालय में पांच महीने से स्थायी निदेशक नहीं है। प्रो. वीके विमल को संविदा शिक्षक नियुक्ति मामले में हटाने के बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच चल रही है। इसी बीच वे सेवानिवृत्त भी हो गए हैं। उनकी जगह कानपुर मेडिकल कॉलजे से डॉ. आनंद चतुर्वेदी को कार्यवाहक निदेशक बनाया गया।
लेकिन उनका एक ऑडियो वायरल हो गया। इसमें कई बड़े लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है। इसके बाद उनको भी हटा दिया गया। शासन ने विशेष सचिव राजकमल यादव को निदेशक का कार्यभार दिया, लेकिन उनके खिलाफ चिकित्सकों ने मोर्चा खोल दिया। विशेष सचिव के हटने के बाद निदेशालय निदेशक विहीन है। इससे जरूरी कार्य ठप हैं।