लोहिया संस्थान के फैकल्टी फोरम के सचिव डॉ. ईश्वर राम धायल ने इस फैसले को सही बताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार किया जाए। इससे चिकित्सा संस्थानों में लंबे समय से कार्य करने वालों को सुपर स्पेशिशियलिटी सेवा का अवसर मिलेगा। चिकित्सा संस्थान हो या मेडिकल कॉलेज वहां कार्य करने वालों की स्थितियों का वर्गीकरण करना होगा। क्लीनिकल, टीचिंग और एकेडमिक कार्य का निर्धारण करके ही उन्हें प्रोफेसर या अन्य पदों पर पदोन्नति करना चाहिए। इससे चिकित्सकों में कार्य के प्रति रुचि बढे़गी।
चंद लोगों का नुकसान, ज्यादा का फायदा
केजीएमयू फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष डॉ. केके सिंह ने सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 70 साल किए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे सिर्फ वे लोग दुखी हैं, जो विभागाध्यक्ष बनने का ख्वाब देख रहे हैं। अन्य किसी भी संकाय सदस्य को कोई नुकसान नहीं है। इतना जरूर है कि सरकार को कार्य और व्यवहार का भी मूल्यांकन कराना चाहिए। जो चिकित्सा शिक्षक मरीजों की सेवा और बेहतरीन चिकित्सक तैयार करने के अभियान में लगे हैं, उन्हें प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। उन्होंने विभागाध्यक्ष के लिए रोटेशन प्रणाली लागू करने की मांग की। कहा कि इससे सभी प्रोफेसरों को मौका मिलेगा।