नगर विकास मंत्री आजम खां के व्यवहार को लेकर अब उनके स्टाफ ने ही बगावत कर दी है।
उनके निजी व अपर सचिवों ने उन्हें खत लिखकर साफ कहा है कि वे उनके साथ काम कर पाने की स्थिति में नहीं हैं।
लिहाजा उन्हें सचिवालय प्रशासन में वापस भेज दिया जाए।
आजम के निजी स्टाफ में शामिल दो निजी सचिव व पांच अपर सचिव उनके साथ नहीं रहना चाहते हैं।
हालांकि खत में दो निजी सचिव व तीन अपर सचिव के ही हस्ताक्षर हैं। निजी स्टाफ की मानें तो दो लोगों के हस्ताक्षर इसलिए नहीं हैं, क्योंकि वे दोनों आजम के साथ हैं।
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स्टाफ के एक कर्मचारी ने बताया कि लगन से कम करने के बाद भी जब वे संतुष्ट नहीं हैं तो काम करने का क्या फायदा।
यह पहला मौका नहीं है जब आजम खां के व्यवहार से अफसर या कर्मचारी उनसे कन्नी काट रहे हों।
नगर विकास विभाग में तो कोई प्रमुख सचिव टिक ही नहीं पा रहा है। पहले प्रवीर कुमार फिर सीबी पालीवाल।
प्रमुख सचिव के पद पर होते हुए भी पालीवाल को काम लायक नहीं समझा गया। इससे आहत होकर वे लंबी छुट्टी पर चल रहे हैं।
खत का मजमून
माननीय मंत्री, संसदीय व नगर विकास। हम लोग पूरी निष्ठा, मेहनत व लगन के साथ आपकी सेवा के साथ शासकीय उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते आ रहे हैं।
पूरी सावधानी व सतर्कता से काम करते हैं। आप हमारी सेवाओं को अपनी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं पा रहे हैं।
इस वजह से आपका व्यवहार अशोभनीय तो होता ही है, साथ ही आवेश में आप असंसदीय भाषा का प्रयोग करने में भी संकोच नहीं करते हैं।
इन कारणों से हम लोग बेहद तनाव का अनुभव कर रहे हैं। इसलिए इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अब आपके साथ आगे अपनी सेवा दे पाने में कठिनाई महसूस हो रही है। अतएव हम लोगों को सचिवालय प्रशासन वापस करने की कृपा करें।
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सचिवालय संघ ने खोला मोर्चा
उत्तर प्रदेश सचिवालय संघ ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से संसदीय कार्यमंत्री आजम खां को तत्काल मंत्री पद से हटाने की मांग की है।
संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्र और सचिव ओंकार नाथ तिवारी ने संयुक्त रूप से कहा है कि मंत्री के स्टाफ की शिकायत गंभीर है।
संसदीय कार्यमंत्री यदि अपने स्टाफ के साथ ही असंसदीय भाषा का इस्तेमाल व दुर्व्यवहार कर रहे हैं तो उन्हें इस पद रहने का कोई अधिकार नहीं।
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